Category Archives: articles

स्वरूपानंद कालेज में हिन्दी दिवस – राष्ट्रभाषा बिना देश गूंगा : महात्मा गांधी

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में हिन्दी विभाग एवं स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया अस्पताल परिसर सेक्टर - 9 के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी ने बताया हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है। महात्मा गांधी ने भी कहा है कि राष्ट्रभाषा के बिना देश गूंगा है। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये डॉ वर्मा ने बताया हिन्दी के प्रति जागरुकता व रुचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से सप्ताह भर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राष्ट्रभाषा राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। राष्ट्रभाषा से देश की आवाज आवाम तक व विदेशों में भी पहुंचती है।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में हिन्दी विभाग एवं स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया अस्पताल परिसर सेक्टर – 9 के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी ने बताया हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है। महात्मा गांधी ने भी कहा है कि राष्ट्रभाषा के बिना देश गूंगा है। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये डॉ वर्मा ने बताया हिन्दी के प्रति जागरुकता व रुचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से सप्ताह भर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राष्ट्रभाषा राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। राष्ट्रभाषा से देश की आवाज आवाम तक व विदेशों में भी पहुंचती है।

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इंदु आईटी स्कूल के बच्चों नें किया इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का निर्माण

भिलाई। इंदु आईटी स्कूल के कक्षा नर्सरी से कक्षा दूसरी तक के बच्चों ने इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। बच्चों ने अपने नन्हे-नन्हे हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं गढ़ीं और इनमें एक-एक बीज भी छिपा दिया। मिट्टी में बीज इसलिए रखा गया ताकि विसर्जन के बाद जो पौधा विकसित होगा वो गणपति बप्पा की याद दिलाएगा। गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण पृथ्वीराज परमार ने दिया। बच्चों ने इन मूर्तियों को प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए सजाया।भिलाई। इंदु आईटी स्कूल के कक्षा नर्सरी से कक्षा दूसरी तक के बच्चों ने इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। बच्चों ने अपने नन्हे-नन्हे हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं गढ़ीं और इनमें एक-एक बीज भी छिपा दिया। मिट्टी में बीज इसलिए रखा गया ताकि विसर्जन के बाद जो पौधा विकसित होगा वो गणपति बप्पा की याद दिलाएगा। गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण पृथ्वीराज परमार ने दिया। बच्चों ने इन मूर्तियों को प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए सजाया।

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मातृभाषा आधारत बहुभाषी शिक्षा जरूरी क्यों?

भिलाई/संजय गुलाटी/ बच्चे जब स्कूल में आते हैं तब वे अपने जाने पहचाने संदर्भ में दैनिक जीवन में उपयोगी मूर्त वस्तु के बारे में अपनी मातृभाषा में बात कर पाते हैं। वे धारा प्रवाह बोल सकते हैं, बोली जाने वाली भाषा का उन्हें बुनियादी व्याकरण और बहुत से मूर्त शब्दों का ज्ञान भी होता है। वे अपनी सारी जरूरतें मातृभाषा में बता सकते हैं। इस प्रकार उनमें आपसी बातचीत का बुनियादी कौशल होता है। इस प्रकार का ज्ञान और कौशल कक्षा-1 के बच्चों के लिए पर्याप्त होता है, जहां शिक्षकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे से उन सभी विषयों पर बातचीत करें जिसके बारे में बच्चों का अपना पूर्व अनुभव / ज्ञान होता है।भिलाई/संजय गुलाटी/ बच्चे जब स्कूल में आते हैं तब वे अपने जाने पहचाने संदर्भ में दैनिक जीवन में उपयोगी मूर्त वस्तु के बारे में अपनी मातृभाषा में बात कर पाते हैं। वे धारा प्रवाह बोल सकते हैं, बोली जाने वाली भाषा का उन्हें बुनियादी व्याकरण और बहुत से मूर्त शब्दों का ज्ञान भी होता है। वे अपनी सारी जरूरतें मातृभाषा में बता सकते हैं। इस प्रकार उनमें आपसी बातचीत का बुनियादी कौशल होता है। इस प्रकार का ज्ञान और कौशल कक्षा-1 के बच्चों के लिए पर्याप्त होता है, जहां शिक्षकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे से उन सभी विषयों पर बातचीत करें जिसके बारे में बच्चों का अपना पूर्व अनुभव / ज्ञान होता है।

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नवागांव में गौठान बना तो सड़कों पर मवेशियों का विचरण हुआ कम

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी के क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशानसन द्वारा बेमेतरा - मउ मुख्य मार्ग में बसे ग्राम नवागांव (खुड़मुड़ी) में गौठान का निर्माण कराया गया। नवागांव में गौठान बनने से अब सड़को पर मवेशियों का विचरण कम हुआ है। इसके पहले मवेशियों की आवाजाही एवं सड़कों पर बैठने के कारण सड़क हादसे होते रहते थे। गौठान में मवेशी एकत्र होने से फसलों का भी सुरक्षा हो रही है और किसान भी निश्चिंत है। पशु मालिक अब मवेशियों को ग़ौठान में भेज रहे है।बेमेतरा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी के क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशानसन द्वारा बेमेतरा – मउ मुख्य मार्ग में बसे ग्राम नवागांव (खुड़मुड़ी) में गौठान का निर्माण कराया गया। नवागांव में गौठान बनने से अब सड़को पर मवेशियों का विचरण कम हुआ है। इसके पहले मवेशियों की आवाजाही एवं सड़कों पर बैठने के कारण सड़क हादसे होते रहते थे। गौठान में मवेशी एकत्र होने से फसलों का भी सुरक्षा हो रही है और किसान भी निश्चिंत है। पशु मालिक अब मवेशियों को ग़ौठान में भेज रहे है।

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सेप्सिस का इलाज महंगा और मुश्किल, बचाव ही तरीका : डॉ श्रीनाथ

वर्ल्ड सेप्सिस डे की पूर्व संध्या पर स्पर्श मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल का जागरूकता अभियान

 भिलाई। स्पर्श मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल के चीफ इंटेसिविस्ट डॉ एस श्रीनाथ ने आज कहा कि सेप्सिस का इलाज महंगा और मुश्किल होता है। इसलिए सेप्सिस से बचने के सभी उपाय किया जाना ही श्रेष्ठ होता है। वे 13 सितम्बर को मनाये जाने वाले ‘वर्ल्ड सेप्सिस डे’ की पूर्व संध्या पर एक पत्रवार्ता को संबोधित कर रहे थे। डॉ श्रीनाथ ने बताया कि सेप्सिस एक संक्रमण है। कमजोर रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले लोगों को यह जल्दी अपनी चपेट में लेता है। इनमें बच्चे, बूढ़े, किडनी की बीमारी, सर्जरी, कैंसर की दवाइयों या शरीर में प्रविष्ठ किए जाने विभिन्न उपकरणों के कारण सेप्सिस हो सकता है। अंग प्रत्यारोपण के बाद भी इसका खतरा रहता है।भिलाई। स्पर्श मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल के चीफ इंटेसिविस्ट डॉ एस श्रीनाथ ने आज कहा कि सेप्सिस का इलाज महंगा और मुश्किल होता है। इसलिए सेप्सिस से बचने के सभी उपाय किया जाना ही श्रेष्ठ होता है। वे 13 सितम्बर को मनाये जाने वाले ‘वर्ल्ड सेप्सिस डे’ की पूर्व संध्या पर एक पत्रवार्ता को संबोधित कर रहे थे। डॉ श्रीनाथ ने बताया कि सेप्सिस एक संक्रमण है। कमजोर रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले लोगों को यह जल्दी अपनी चपेट में लेता है। इनमें बच्चे, बूढ़े, किडनी की बीमारी, सर्जरी, कैंसर की दवाइयों या शरीर में प्रविष्ठ किए जाने विभिन्न उपकरणों के कारण सेप्सिस हो सकता है। अंग प्रत्यारोपण के बाद भी इसका खतरा रहता है।

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