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बच्चों ने दीये बनाकर बेचे, पैसे जमाकर वृद्धाश्रम को दिया वाटर कूलर

Students make and sell Diya on diwali to help oldage home peopleरायपुर। होली हार्ट्स स्कूल के करीब 25 बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी के दीये बनाए और फिर उन्हें बेचकर एकत्रित पैसों से एक वाटर कूलर खरीदकर वृद्धाश्रम को भेंट किया ताकि वहां रह रहे बुजुर्ग ठंडा पानी पी सकें। प्रिन्सी धावना, तौसीफ शरीफ, पीयूष लालवानी, नीति सोलंकी, रिजवान खान, जीत चावड़ा, निशांत पाठक, करण कुमार, मनोज अरोरा, युक्ता डागा, मुस्कान कृष्णानी, रोशनी जैन, हर्षा पंजवानी, दीक्षा प्रकाश, नंदिनी अंसाती, लावण्या बरड़िया, स्पर्श जैन, साक्षी शेर्के, शुभम जीवन, अमिताभ सिंह, ओसिमा गुप्ता, अदिति सिंह, तान्या मथानी के चेहरों पर नेक काम करने की खुशी छलक रही थी।
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प्राचीन बस्तर में चलते थे गजलक्ष्मी की आकृति वाले सोने के सिक्के

Gajalaxmi Gold Coins were in use in ancient Bastarजगदलपुर। अनादि काल से लक्ष्मी का विशेष महत्व रहा है और आज भी लक्ष्मी के लिए देश में सबसे बड़ा पर्व दीपावली मनाया जाता है। भले ही आज बस्तर की गिनती पिछड़े-वनांचल के रूप में होती है लेकिन बस्तर ने वह युग भी देखा है जब यहां सोने के सिक्के चलते थे, वह भी गजलक्ष्मी की आकृति वाली। तीन स्थानों से प्राप्त ऐसे एक हजार साल पुराने 25 सिक्कों को सुरक्षा के हिसाब से जिला पुरातत्व संग्रहालय के लॉकर में रखा गया है। अब तक आठ स्थानों में हुई खुदाई से विभाग को कुल 171 स्वर्ण मुद्राएं मिली हैं। वहीं दो क्विंटल 10 किग्रा वजनी चांदी के हजारों सिक्के जिला कोषालय में जमा हैं।

सुहानी शाह ने दूसरी में पढ़ाई छोड़ी और आज कारपोरेट ट्रेनर

Suhani-Shah-Santosh-Raiभिलाई। सुहानी शाह ने दूसरी में औपचारिक शिक्षा का त्याग कर दिया और अपने पसंदीदा क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया। सात साल की उम्र में अपना पहला शो करने वाली सुहानी की उम्र अभी 27 साल है और उनके पीछे 20 साल का लंबा सफल करियर है। सुहानी जादू के शो करती हैं। पणजी में माइंड केयर क्लिनिक चलाती हैं। उनकी 5 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे एक सफल कारपोरेट ट्रेनर हैं। सुहानी बताती हैं कि यह जीवन हमें सफल होने के लिए मिला है। असफलता अपवाद है। जीवन बहुत सरल है। हम स्वयं इसे पेचीदा बनाते हैं और फिर इससे पैदा होने वाली उलझनों को सुलझाने में उलझ जाते हैं। हम सरल रहें। अपने काम पर फोकस करें और उसे बेहतर ढंग से करने के लिए निरंतर प्रयास करें। आप जो भी काम करते हैं, उसमें बेस्ट बनें। सफलता अपने आप आपके कदम चूमेगी।

देवी लक्ष्मी के रूप में पूजी जाती हैं मां दंतेश्वरी : 800 साल से चली आ रही है परंपरा

Danteshwari Ma is also worshippped as Godess Laxmiदंतेवाड़ा। कार्तिक अमावस्या की रात देवी लक्ष्मी की पूजा सभी घर और मंदिरों में होती है पर दंतेवाड़ा शक्तिपीठ में 9 दिन पहले ही लक्ष्मी पूजन शुरु हो जाती है। देवी दंतेश्वरी की भी लक्ष्मी के रूप में पूजा करते हैं। यह अनूठी परंपरा यहां 800 साल से चली आ रही है। दीपावली के पूर्व ही माई दंतेश्वरी के पूजा तुलसीपानी विधान से होती है। पुजारी प्रतिदिन ब्रम्हमुहूर्त में डंकनी-शंकनी में स्नान के बाद पूजा-विधान संपन्न् करते हैं। नवरात्र पर माईजी को दुर्गा के 9 रुपों में आराधना करते हैं तो धनतरेस से 9 पहले देवी लक्ष्मी स्वरूप में पूजा होता है।

तेदमंता अभियान से उखडऩे लगे हैं नक्सलियों के पांव

Naxal step out as Tedmanta gains pace in Bastarरायपुर। तेदमंता अभियान पुलिस और ग्रामीणों को पास ला रही है। पहले जहां लोग पुलिस से बातचीत नहीं करना चाहते थे, उनके साथ दिखना नहीं चाहते थे वहीं अब वे उन्हें अपनी बैठकों में बुलाने लगे हैं। तेदमंता से जुड़े गांवों में अब नक्सलियों की आमद कम हो गई है। दोरनापाल के एसडीओपी विवेक शुक्ला ने एक कला जत्था दल बनाने की योजना बनाई जिसमें एसपी और अन्य अफसरों की सहमति मिल गई।

गायत्री परिवार ने नक्सल प्रभावित सात जिलों को गोद लिया

रायपुर। गायत्री परिवार ने नक्सल प्रभावित सात जिलों को गोद लिया है। अशांत जिलों में दंडकारण्य परियोजना शुरू की जाएगी। शांति के लिए आध्यात्मिक, सामाजिक और भौतिक प्रगति करने में गायत्री परिवार विशेष योगदान देगा।रायपुर। गायत्री परिवार ने नक्सल प्रभावित सात जिलों को गोद लिया है। अशांत जिलों में दंडकारण्य परियोजना शुरू की जाएगी। शांति के लिए आध्यात्मिक, सामाजिक और भौतिक प्रगति करने में गायत्री परिवार विशेष योगदान देगा। छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए गायत्री परिवार हरिद्वार के प्रमुख प्रणव पंड्या राजनीति, धर्म, धर्मगुरु और नक्सलवाद पर खुलकर बोले।
राजधानी में पत्रकारों से चर्चा में पंड्या ने कहा कि धर्म का राजनीति से संबंध नहीं है। धर्म की गोद में बैठना, धर्म के नाम पर वोट मांगना गलत है। धर्म तंत्र आदर्श है, लेकिन राजनीति तंत्र के आयाम ही दूसरे हैं। उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार ने बस्तर सहित कांकेर, नारायणपुर, सुकमा, कोडागांव, बीजापुर, दंतेवाड़ा को गोद लिया है। इन जिलों के एक-एक बच्चे को गायत्री परिवार से जुड़े ढाई हजार राइस मिलर गोद लेंगे। दंडकारण्य परियोजना का संभागीय मुख्यालय फरसगांव के मसोरा गांव में होगा ।

डॉ संतोष राय ने बदली भिलाई की सोच : रवि

Dr Santosh Rai Institute भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम रवि कुमार ने कहा कि डॉ संतोष राय ने भिलाई की सोच को बदल कर रख दिया। आधुनिक भारत के इस औद्योगिक तीर्थ के अधिकांश होनहार बच्चे गणित और विज्ञान ही पढऩा चाहते थे। डॉ संतोष राय ने अपने अथक प्रयासों से इसे बदल दिया और कॉमर्स को एक उम्दा और संभावनाओं से भरे विषय के रूप में स्थापित किया। उन्होंने डॉ संतोष राय को ट्रेंड सेटर की संज्ञा भी दी।

25 की सिग्मा का 22.5 साल का थिएटर करियर

Sigma-Upadhyay-Sets भिलाई। मशहूर थिएटर आर्टिस्ट विभाष एवं अनिता उपाध्याय की बेटी सिग्मा अभी सिर्फ 25 साल की है पर थिएटर का उसका अनुभव 22.5 का हो गया है। सिग्मा 22 अक्टूबर की शाम एसएनजी विद्याभवन में 7 स्टेप्स अराउंड द फायर (अग्नि के सात फेरे) का मंचन करने जा रही हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्ले का अनुवाद, परिकल्पना एवं निर्देशन सिग्मा ने ही किया है। इस आयोजन से पहले हमने सिग्मा से मिलने का विचार किया। सिग्मा इन दिनों अपने प्ले के प्रॉप्स एवं सेट्स की तैयारी में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि इस प्ले का मंचन एक बड़ी चुनौती है। प्ले का इससे पहले ऑकलैंड, कनाडा और दक्षिण भारत के विश्वविद्यालय में मंचन हो चुका है। इस नाटक को वे अपने इनटर्नशिप प्रोजेक्ट के तहत कर रही हैं। 

57 साल की सेवा के बाद ब्लास्ट फर्नेस-2 हमेशा के लिए बंद

Bhilai Steel Plant Blast Furnace 2 Blown OUtभिलाई। 57 साल की सेवा के बाद ब्लास्ट फर्नेस-2 हमेशा के लिए बंद हो गया। 12 अक्टूबर को धमन भट्ठी क्रमांक-2 को ब्लोइंग आउट के बाद सदा के लिए बंद कर दिया गया है। ब्लोइंग आउट की प्रक्रिया 10 अक्टूबर की शाम को प्रारंभ की गई थी और 11 अक्टूबर देर शाम तक चली। पूरी भट्ठी खाली की गई और फिर सेलामेंडल टैपिंग कर फर्नेस की हर्थ से भी बचा हुआ पिघला लोहा निकालकर ब्लोइंग आउट प्रक्रिया पूर्ण की गई। भट्ठी को पानी डालकर ठंडा भी कर दिया गया। इसके साथ ही धमन भट्ठी क्रमाँक-2 की धड़कन अब सदा के लिए बंद कर दी गई।

विदेशी नस्ल के कुत्तों को भाने लगा सस्ता देसी फूड

राजनांदगांव। विदेशी नस्ल के कुत्तों का पालना अब कुछ आसान हो चला है। 725 रुपए किलो मिलने वाले विदेशी फीड के मुकाबले यह फीड 190 रुपए प्रति किलो मिलता है। इसमें प्रोटीन और एनर्जी का अच्छा संतुलन है। विदेशी कुत्ते इसे पसंद भी कर रहे हैं। इसका निर्यात श्रीलंका और भूटान को भी किया जा रहा है। राजनांदगांव। विदेशी नस्ल के कुत्तों का पालना अब कुछ आसान हो चला है। 725 रुपए किलो मिलने वाले विदेशी फीड के मुकाबले यह फीड 190 रुपए प्रति किलो मिलता है। इसमें प्रोटीन और एनर्जी का अच्छा संतुलन है। विदेशी कुत्ते इसे पसंद भी कर रहे हैं। इसका निर्यात श्रीलंका और भूटान को भी किया जा रहा है।

चुनौतियों को बनाएं सफलता की सीढ़ी : युगल किशोर

भिलाई। रुंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर युगल किशोर ने युवाओं का आह्वान किया है कि अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सबसे अपना लक्ष्य निर्धारित करें। लक्ष्य को पाने के लिए अपने जीवन में आदर्श बनायें एवं मुश्किलों को सफलता की सीढ़ी समझें। भिलाई। रुंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर युगल किशोर ने युवाओं का आह्वान किया है कि अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सबसे अपना लक्ष्य निर्धारित करें। लक्ष्य को पाने के लिए अपने जीवन में आदर्श बनायें एवं मुश्किलों को सफलता की सीढ़ी समझें। युगल किशोर दीया छत्तीसगढ़ द्वारा अपोलो कॉलेज ऑफ फार्मेसी एवं नर्सिंग के स्टूडेंट्स के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि करियर के साथ साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को भी समझें तथा उसके अनुरूप आचरण करें।

दृष्टि बाधित मनस्वी भाटी ने साइकिल पर तय किया हिमालय का रास्ता

पुणे। अपने पिता के साथ एक टैंडम साइकल पर 15 साल की मनस्वी भाटी ने हिमाचल प्रदेश के मनाली से जम्मू-कश्मीर के खारदूंग ला पास तक का सफर तय कर एक मिसाल कायम की है। यह उपलब्धी और भी खास इसलिए बन जाती है क्योंकि मनस्वी अपनी आंखें खो चुकी हैं। टैंडम साइकल में दो सीटें और दो पैडल होते हैं।पुणे। अपने पिता के साथ एक टैंडम साइकल पर 15 साल की मनस्वी भाटी ने हिमाचल प्रदेश के मनाली से जम्मू-कश्मीर के खारदूंग ला पास तक का सफर तय कर एक मिसाल कायम की है। यह उपलब्धी और भी खास इसलिए बन जाती है क्योंकि मनस्वी अपनी आंखें खो चुकी हैं। टैंडम साइकल में दो सीटें और दो पैडल होते हैं। मनस्वी और उनके पिता भारत में पहली बार हो रहे टैंडम साइकल अभियान का हिस्सा थे।

विद्या बालन को आज भी याद है ट्रेन का वह बेशर्म लड़का

विद्या बालन को आज भी याद है ट्रेन का वह बेशर्म लड़काफिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ में एक नाइट रेडियो जॉकी की भूमिका निभा रही विद्या बालन को आज भी मुंबई के लोकल ट्रेन का वह वाकया याद है जब एक युवक लेडीज कम्पार्टमेंट में चढ़ गया था। वह उनके सामने बैठकर मास्टरबेट करने लगा था। विद्या ने नेहा धूपिया के शो ‘नो फिल्टर नेहा’ में बताया कि उन दिनों वह सेंट जेवियर में पढ़ती थीं।

‘पद्मावती’ के बाद डिप्रेशन से जूझ रही दीपिका

Deepika depressionजब से संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावती’ में रानी पद्मिनी का रोल निभा रहीं दीपिका पादुकोण का पहला लुक सामने आया है, वह चर्चा में बनी हुई हैं। जौहर का सीन फिल्माने का दीपिका के दिमाग पर बहुत खराब असर पड़ा है। दीपिका स्वीकार कर चुकी हैं कि वह डिप्रेशन का शिकार रही हैं। दीपिका ने कहा कि डिप्रेशन से उनकी लड़ाई इतनी बुरी रही है कि उन्हें हमेशा डर रहता है कि वह वापस उसके चंगुल में ना फंस जाएं। उन्होंने कहा, वह दौर मेरे लिए सबसे बुरा अनुभव रहा है।’

मां ने सब्जियां बेचकर अपने बेटों को बना दिया डाक्टर

Mother sells vegetables to make sons doctorधमतरी। मतरी की मंगलीन बाई ने खुद कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। लेकिन, सब्जी बेचकर, कड़ी मेहनत और लगन से मंगलीन ने अपने दो बेटों को बना दिया डॉक्टर । मंगलीन आज भी सब्जी बेचती है। वे कहती हैं, काम में शर्म कैसा। आखिर इसी से बेटों को डाक्टर बना पाई। मंगलीन आज भी सब्जी बेचती है। वे कहती हैं, काम में शर्म कैसा। आखिर इसी से बेटों को डाक्टर बना पाई। मंगलीन शादी के बाद खपरैल मकान में रहने के लिए आई। तीन बेटों और तीन बेटियों को जन्म दिया। पति की कमाई कम पड़ी तो वह सब्जी बेचने लगीं। फिर रेग पर जमीन लेकर सब्जी उगाने लगीं। सब्जी बेचने के लिए सिर पर सब्जी का टोकरा लेकर बाजार जातीं। बेटा संतोष और सुखनंदन मन लगाकर पढ़ते रहे। इम्तहान देते रहे, अव्वल आते रहे।