Category Archives: Tourism

देशभर में प्रसिद्ध है 500 साल पुराना रायपुर का बंजारी मंदिर

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रायपुर। रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर देशभर में प्रसिद्घ है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। बैठकी, अष्टमी और पंचमी के दिन विशेष पूजन अर्चना होती है और इन दिवसों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। बंजारी मंदिर के ठीक सामने परिसर में अमर जवान ज्योत निरंतर जलती रहती है। यहां शान से लहराता तिरंगा देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। देवी भक्ति और देश प्रेम का यहां अनूठा संगम है।रायपुर। रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर देशभर में प्रसिद्घ है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। बैठकी, अष्टमी और पंचमी के दिन विशेष पूजन अर्चना होती है और इन दिवसों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। बंजारी मंदिर के ठीक सामने परिसर में अमर जवान ज्योत निरंतर जलती रहती है। यहां शान से लहराता तिरंगा देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। देवी भक्ति और देश प्रेम का यहां अनूठा संगम है।

तीन मुखों वाली त्रिशक्ति स्तम्भन की देवी माता बगलामुखी

पृथ्वीलोक में माता बगलामुखी तीन स्थानों पर विराजमान है, जो दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं। नलखेड़ा में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां महालक्ष्मी और बाएं मां सरस्वती विराजमान हैं। मां बगलामुखी का त्रिशक्ति स्वरूप में मंदिर भारत में और कहीं नहीं है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है।नलखेड़ा. पृथ्वीलोक में माता बगलामुखी तीन स्थानों पर विराजमान है, जो दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं। नलखेड़ा में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां महालक्ष्मी और बाएं मां सरस्वती विराजमान हैं। मां बगलामुखी का त्रिशक्ति स्वरूप में मंदिर भारत में और कहीं नहीं है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है।

अमेरिका में रह रहे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों ने हर्षोल्लास से मनाई होली

शिकागो। उत्तरी अमेरिका में रह रहे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों ने हर्ष और उल्लास के साथ रंगों का पर्व होली मनाया। नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन NACHA के भाई गणेश कर ने होली उत्सव की तस्वीरें ई-मेल पर साझा की हैं साथ ही होली उत्सव का यूट्यूब वीडियो भी साझा किया है। उन्होंने बताया कि उत्तरी अमेरिका के विभिन्न इलाकों Chicago, Atlanta में रहने वाले छत्तीसगढ़ मूल के एनआरआई समुदाय ने मौसम के हिसाब से आयोजन किये। शिकागो में जहां भीषण सर्दी के कारण आयोजन इनडोर किया गया वहीं कुछ भागों में यह आयोजन पार्क में हुआ। लोगों ने रंग गुलास खेलने के साथ ही नृत्य और संगीत के साथ खुशियां मनाईं। समुदाय ने यहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में भी आयोजन किये।शिकागो। उत्तरी अमेरिका में रह रहे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों ने हर्ष और उल्लास के साथ रंगों का पर्व होली मनाया। नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन NACHA के भाई गणेश कर ने होली उत्सव की तस्वीरें ई-मेल पर साझा की हैं साथ ही होली उत्सव का यूट्यूब वीडियो भी साझा किया है। उन्होंने बताया कि उत्तरी अमेरिका के विभिन्न इलाकों Chicago, Atlanta में रहने वाले छत्तीसगढ़ मूल के एनआरआई समुदाय ने मौसम के हिसाब से आयोजन किये।

संतोष रूंगटा ग्रुप के मैनेजमेंट स्टूडेंट्स के दल ने साहस शिविर में की शिरकत

भिलाई। संतोष रूंगटा समूह द्वारा भिलाई के कोहका स्थित कैम्पस में संचालित रूंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी बिजनेस स्कूल के एमबीए कोर्स के दूसरे तथा चौथे सेमेस्टर के स्टूडेंट्स तथा फैकल्टी के 48 सदस्यीय दल ने नासिक (महाराष्ट्र) स्थित आउटवर्ड बाउण्ड भारत के कैम्पस में आयोजित 3-दिवसीय साहस-द कैम्प में शिरकत की। संतोष रूंगटा समूह के डायरेक्टर एफएण्डए सोनल रूंगटा ने बताया कि आज कॉर्पोरेट वल्र्ड में मैनेजमेंट के सभी गुरों की आवश्यकता होती है। भावी युवा मैनेजर्स के लिये मैनेजमेंट गोल हासिल करने लीडरशिप स्किल तथा सेल्फ कॉन्फीडेन्स का होना अत्यंत आवश्यक है। टीम मैनेजमेंट आज मैनेजमेंट का मूल मंत्र है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिविर के माध्यम से मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को अपने लाईफ स्किल्स बढ़ाने के लिये अवसर प्रदान करना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य था। भिलाई। संतोष रूंगटा समूह द्वारा भिलाई के कोहका स्थित कैम्पस में संचालित रूंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी बिजनेस स्कूल के एमबीए कोर्स के दूसरे तथा चौथे सेमेस्टर के स्टूडेंट्स तथा फैकल्टी के 48 सदस्यीय दल ने नासिक (महाराष्ट्र) स्थित आउटवर्ड बाउण्ड भारत के कैम्पस में आयोजित 3-दिवसीय साहस-द कैम्प में शिरकत की। संतोष रूंगटा समूह के डायरेक्टर एफएण्डए सोनल रूंगटा ने बताया कि आज कॉर्पोरेट वल्र्ड में मैनेजमेंट के सभी गुरों की आवश्यकता होती है। भावी युवा मैनेजर्स के लिये मैनेजमेंट गोल हासिल करने लीडरशिप स्किल तथा सेल्फ कॉन्फीडेन्स का होना अत्यंत आवश्यक है। टीम मैनेजमेंट आज मैनेजमेंट का मूल मंत्र है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिविर के माध्यम से मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को अपने लाईफ स्किल्स बढ़ाने के लिये अवसर प्रदान करना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य था। 

विदेशी पर्यटकों को खूब भा रहा बस्तर का टूरिस्ट विलेज कंसेप्ट

जगदलपुर। नक्सली उत्पात के चलते हाशिए पर आए बस्तर टूरिज्म को नए सिरे से जीवित कर दिखाया है एक सामान्य से किसान ने। उसने पांच गांवों को पर्यटक गांव के रूप में विकसित कर लिया है। यहां विदेशी टूरिस्ट पहुंचने लगे हैं। जगदलपुर ब्लॉक के ग्राम पराली के किसान शकील रिजवी ने यह कमाल कर दिखाया है। उन्होंने न केवल इस ब्लॉक के पांच गांवों को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर दिया है, वरन विदेशी सैलानियों को भी यहां लाने में कामयाब हो गए हैं।जगदलपुर। नक्सली उत्पात के चलते हाशिए पर आए बस्तर टूरिज्म को नए सिरे से जीवित कर दिखाया है एक सामान्य से किसान ने। उसने पांच गांवों को पर्यटक गांव के रूप में विकसित कर लिया है। यहां विदेशी टूरिस्ट पहुंचने लगे हैं। जगदलपुर ब्लॉक के ग्राम पराली के किसान शकील रिजवी ने यह कमाल कर दिखाया है। उन्होंने न केवल इस ब्लॉक के पांच गांवों को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर दिया है, वरन विदेशी सैलानियों को भी यहां लाने में कामयाब हो गए हैं।

पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित है हजारों साल पुरानी अष्टभुजा शंकर प्रतिमा

सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।

अद्भुत है 800 वर्ष पुराने इस अष्टकोणीय शिवमंदिर की संरचना

कटघोरा, कोरबा (छत्तीसगढ़)। पाली के प्राचीन अष्टकोणीय शिवमंदिर की एक खासियत ऐसी भी है, जो इसकी संरचना को राज्य में अद्वितीय बनाता है। वैसे तो ऐतिहासिक महत्व वाले कई प्राचीन मंदिर प्रदेशभर में निर्मित हैं, लेकिन तकनीकी दृष्टिकोण से यहां का अष्टकोणीय मंडप आधारित देवालय छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं। यह एक वर्ग के कोनों को काटने से बनी एक अद्भुत आकृति है, जो गभर्गृह से जुड़कर मंदिर को पूरा करती है। यही पुरातात्विक गुण इस ऐतिहासिक शिवमंदिर को राज्य की अन्य संरचनाओं से अलग पहचान देता है। कटघोरा, कोरबा (छत्तीसगढ़)। पाली के प्राचीन अष्टकोणीय शिवमंदिर की एक खासियत ऐसी भी है, जो इसकी संरचना को राज्य में अद्वितीय बनाता है। वैसे तो ऐतिहासिक महत्व वाले कई प्राचीन मंदिर प्रदेशभर में निर्मित हैं, लेकिन तकनीकी दृष्टिकोण से यहां का अष्टकोणीय मंडप आधारित देवालय छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं। यह एक वर्ग के कोनों को काटने से बनी एक अद्भुत आकृति है, जो गभर्गृह से जुड़कर मंदिर को पूरा करती है। यही पुरातात्विक गुण इस ऐतिहासिक शिवमंदिर को राज्य की अन्य संरचनाओं से अलग पहचान देता है। 

बूढ़ातालाब और पुरानी बस्ती समेटे है समृद्ध अतीत की थाती

रायपुर। ऐतिहासिक शहर रायपुर के सीने में कई सौ सालों का इतिहास दफ्न है। इस शहर में कभी स्वामी विवेकानंद ने प्रवास किया था। आजादी के संघर्ष का यह शहर साक्षी है और अनेक महामनाओं के यहां चरण पड़े। कुछ ने तो इसी धरती पर जन्म लिया। इससे अलग शहर के पुरानी बस्ती इलाके में प्राचीन वास्तुकौशल की विरासत आज भी संरक्षित है।रायपुर। ऐतिहासिक शहर रायपुर के सीने में कई सौ सालों का इतिहास दफ्न है। इस शहर में कभी स्वामी विवेकानंद ने प्रवास किया था। आजादी के संघर्ष का यह शहर साक्षी है और अनेक महामनाओं के यहां चरण पड़े। कुछ ने तो इसी धरती पर जन्म लिया। इससे अलग शहर के बूढ़ातालाब और पुरानी बस्ती इलाके में प्राचीन वास्तुकौशल की विरासत आज भी संरक्षित है। 

दक्षिण के इस स्वर्ण मंदिर में लगा है 1500 किलो सोना

चेन्नै। स्वर्ण मंदिर का नाम आते ही दिमाग में पंजाब के स्वर्ण मंदिर की याद आ जाती है। मगर, तमिलनाडु के वेल्लोर नगर के मलाईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित महालक्ष्मी मंदिर में 1500 किलो सोना लगा है। इसे दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है। रात के वक्त रोशनी में बहुत खूबसूरत दिखता है। 100 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में फैला यह मंदिर चारों तरफ से हरियाली से घिरा हुआ है। इस मंदिर को भक्तों के लिए 2007 में खोला गया था।चेन्नै। स्वर्ण मंदिर का नाम आते ही दिमाग में पंजाब के स्वर्ण मंदिर की याद आ जाती है। मगर, तमिलनाडु के वेल्लोर नगर के मलाईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित महालक्ष्मी मंदिर में 1500 किलो सोना लगा है। इसे दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है। रात के वक्त रोशनी में बहुत खूबसूरत दिखता है। 100 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में फैला यह मंदिर चारों तरफ से हरियाली से घिरा हुआ है। इस मंदिर को भक्तों के लिए 2007 में खोला गया था।

ताज महल को ‘गोद’ लेने वाला कोई नहीं

Heritage Siteनई दिल्ली। ताज महल को लेकर हाल के दिनों में सियासी उठापटक के बीच एक और खबर आई है। जब बुधवार को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने ‘अडॉप्ट अ हेरिटेज’ योजना के तहत निजी समूहों द्वारा गोद ली गई 14 धरोहरों की लिस्ट जारी की, तो उसमें ताज महल नहीं मिला। स्कीम के तहत धरोहर स्थलों के रखरखाव का जिम्मा निजी समूहों को दिया जाना था। लेकिन किसी भी संस्था ने ताज महल में रूचि नहीं दिखाई।