Category Archives: Tourism

नष्ट हो रहा आमदी गांव का इतिहास, उपेक्षित है इकलौती बावड़ी

इनटैक की टीम ने किया विरासत का अवलोकन

भिलाई। आमदी नाम भिलाई नगर वासियों के लिए नया नहीं है। 1960 के दशक में जब भिलाई इस्पात संयंत्र के पहले अस्पताल की नींव रखी गई तो उसे आमदी अस्पताल का ही नाम दिया गया। कालांतर में हुडको ने अस्पताल से लगकर कालोनी बसाई तो उसका नाम भी आमदी पर रखा गया। इसी आमदी की विरासत दुर्ग रेलवे स्टेशन के सामने एक अनाम पुराने अहाते में उपेक्षा का शिकार होकर नष्ट हो रहा है। यह जिले की एकमात्र बावड़ी है जिसे संभव 150 साल पहले बनाया गया था।भिलाई। आमदी नाम भिलाई नगर वासियों के लिए नया नहीं है। 1960 के दशक में जब भिलाई इस्पात संयंत्र के पहले अस्पताल की नींव रखी गई तो उसे आमदी अस्पताल का ही नाम दिया गया। कालांतर में हुडको ने अस्पताल से लगकर कालोनी बसाई तो उसका नाम भी आमदी पर रखा गया। इसी आमदी की विरासत दुर्ग रेलवे स्टेशन के सामने एक अनाम पुराने अहाते में उपेक्षा का शिकार होकर नष्ट हो रहा है। यह जिले की एकमात्र बावड़ी है जिसे संभवत: 150 साल पहले बनाया गया था।

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भोरमदेव के ऐतिहासिक मंदिरों की भव्यता देख चकित हुए एमजे कालेज के विद्यार्थी

Bhoramdeoभिलाई। एमजे कालेज के कम्प्यूटर साइंस संकाय के विद्यार्थियों ने कबीरधाम जिले का शैक्षणिक भ्रमण किया। महाविद्यालय की डायरेक्टर श्रीलेखा विरुलकर के दिशा निर्देश पर बनाई गई इस भ्रमण योजना के तहत बच्चों ने सरोदा जलाशय, भोरमदेव का प्राचीन शिव मंदिर एवं सीमावर्ती जंगलों में स्थित रानी दरहा जल प्रपात का अवलोकन कर इन स्थलों के विषय में जानकारियां प्राप्त की।

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एमजे कालेज शैक्षणिक भ्रमण : देवबलौदा में दफ्न है तिलस्मी गुफा और अधूरे मंदिर का राज

Deobaloda Charoda Educational Tour MJ Collegeभिलाई। एमजे कालेज की निदेशक श्रीमती श्रीलेखा विरुलकर एवं प्राचार्य डॉ कुबेर सिंह गुुरुपंच की प्रेरणा से वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई ने शनिवार 17 नवम्बर को देवबलौदा चरोदा का शैक्षणिक भ्रमण किया। यहां के अपूर्ण मंदिर और तिलस्मी गुफा के रहस्य को जानने समझने की कोशिश की। साथ ही ग्रामीणों, ग्रामीण विद्यार्थियों के साथ शैक्षणिक चर्चा भी की। रासेयो इकाई ने इस पुरा महत्व के मंदिर परिसर की साफ सफाई करने के साथ ही पुरा सम्पदा की रक्षा का संकल्प भी लिया।

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मैनपाट में कुदरत का करिश्मा, रबर की तरह उछालती है धरती

Mainpat bouncing landरायपुर। मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। एक ऐसी जगह, जहां पूरी जमीन स्पंज के समान है। आप अगर इस पर थोड़ा भी उछलें तो यह आपको दो से तीन फीट तक उछाल देती है। जगह का नाम है जलजली। यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण और मनोरंजन का केंद्र बन चुका है। वैज्ञानिक यहां की भूमि संरचना व गुरुत्वाकर्षण पर शोध भी कर रहे हैं। बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैला यह इलाका बिना भूकंप के हिलता हुआ सा प्रतीत होता है।

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देशभर में प्रसिद्ध है 500 साल पुराना रायपुर का बंजारी मंदिर

रायपुर। रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर देशभर में प्रसिद्घ है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। बैठकी, अष्टमी और पंचमी के दिन विशेष पूजन अर्चना होती है और इन दिवसों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। बंजारी मंदिर के ठीक सामने परिसर में अमर जवान ज्योत निरंतर जलती रहती है। यहां शान से लहराता तिरंगा देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। देवी भक्ति और देश प्रेम का यहां अनूठा संगम है।रायपुर। रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर देशभर में प्रसिद्घ है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। बैठकी, अष्टमी और पंचमी के दिन विशेष पूजन अर्चना होती है और इन दिवसों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। बंजारी मंदिर के ठीक सामने परिसर में अमर जवान ज्योत निरंतर जलती रहती है। यहां शान से लहराता तिरंगा देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। देवी भक्ति और देश प्रेम का यहां अनूठा संगम है।

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तीन मुखों वाली त्रिशक्ति स्तम्भन की देवी माता बगलामुखी

पृथ्वीलोक में माता बगलामुखी तीन स्थानों पर विराजमान है, जो दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं। नलखेड़ा में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां महालक्ष्मी और बाएं मां सरस्वती विराजमान हैं। मां बगलामुखी का त्रिशक्ति स्वरूप में मंदिर भारत में और कहीं नहीं है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है।नलखेड़ा. पृथ्वीलोक में माता बगलामुखी तीन स्थानों पर विराजमान है, जो दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं। नलखेड़ा में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां महालक्ष्मी और बाएं मां सरस्वती विराजमान हैं। मां बगलामुखी का त्रिशक्ति स्वरूप में मंदिर भारत में और कहीं नहीं है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है।

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अमेरिका में रह रहे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों ने हर्षोल्लास से मनाई होली

शिकागो। उत्तरी अमेरिका में रह रहे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों ने हर्ष और उल्लास के साथ रंगों का पर्व होली मनाया। नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन NACHA के भाई गणेश कर ने होली उत्सव की तस्वीरें ई-मेल पर साझा की हैं साथ ही होली उत्सव का यूट्यूब वीडियो भी साझा किया है। उन्होंने बताया कि उत्तरी अमेरिका के विभिन्न इलाकों Chicago, Atlanta में रहने वाले छत्तीसगढ़ मूल के एनआरआई समुदाय ने मौसम के हिसाब से आयोजन किये। शिकागो में जहां भीषण सर्दी के कारण आयोजन इनडोर किया गया वहीं कुछ भागों में यह आयोजन पार्क में हुआ। लोगों ने रंग गुलास खेलने के साथ ही नृत्य और संगीत के साथ खुशियां मनाईं। समुदाय ने यहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में भी आयोजन किये।शिकागो। उत्तरी अमेरिका में रह रहे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों ने हर्ष और उल्लास के साथ रंगों का पर्व होली मनाया। नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन NACHA के भाई गणेश कर ने होली उत्सव की तस्वीरें ई-मेल पर साझा की हैं साथ ही होली उत्सव का यूट्यूब वीडियो भी साझा किया है। उन्होंने बताया कि उत्तरी अमेरिका के विभिन्न इलाकों Chicago, Atlanta में रहने वाले छत्तीसगढ़ मूल के एनआरआई समुदाय ने मौसम के हिसाब से आयोजन किये।

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संतोष रूंगटा ग्रुप के मैनेजमेंट स्टूडेंट्स के दल ने साहस शिविर में की शिरकत

भिलाई। संतोष रूंगटा समूह द्वारा भिलाई के कोहका स्थित कैम्पस में संचालित रूंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी बिजनेस स्कूल के एमबीए कोर्स के दूसरे तथा चौथे सेमेस्टर के स्टूडेंट्स तथा फैकल्टी के 48 सदस्यीय दल ने नासिक (महाराष्ट्र) स्थित आउटवर्ड बाउण्ड भारत के कैम्पस में आयोजित 3-दिवसीय साहस-द कैम्प में शिरकत की। संतोष रूंगटा समूह के डायरेक्टर एफएण्डए सोनल रूंगटा ने बताया कि आज कॉर्पोरेट वल्र्ड में मैनेजमेंट के सभी गुरों की आवश्यकता होती है। भावी युवा मैनेजर्स के लिये मैनेजमेंट गोल हासिल करने लीडरशिप स्किल तथा सेल्फ कॉन्फीडेन्स का होना अत्यंत आवश्यक है। टीम मैनेजमेंट आज मैनेजमेंट का मूल मंत्र है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिविर के माध्यम से मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को अपने लाईफ स्किल्स बढ़ाने के लिये अवसर प्रदान करना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य था। भिलाई। संतोष रूंगटा समूह द्वारा भिलाई के कोहका स्थित कैम्पस में संचालित रूंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी बिजनेस स्कूल के एमबीए कोर्स के दूसरे तथा चौथे सेमेस्टर के स्टूडेंट्स तथा फैकल्टी के 48 सदस्यीय दल ने नासिक (महाराष्ट्र) स्थित आउटवर्ड बाउण्ड भारत के कैम्पस में आयोजित 3-दिवसीय साहस-द कैम्प में शिरकत की। संतोष रूंगटा समूह के डायरेक्टर एफएण्डए सोनल रूंगटा ने बताया कि आज कॉर्पोरेट वल्र्ड में मैनेजमेंट के सभी गुरों की आवश्यकता होती है। भावी युवा मैनेजर्स के लिये मैनेजमेंट गोल हासिल करने लीडरशिप स्किल तथा सेल्फ कॉन्फीडेन्स का होना अत्यंत आवश्यक है। टीम मैनेजमेंट आज मैनेजमेंट का मूल मंत्र है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिविर के माध्यम से मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को अपने लाईफ स्किल्स बढ़ाने के लिये अवसर प्रदान करना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य था। 

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विदेशी पर्यटकों को खूब भा रहा बस्तर का टूरिस्ट विलेज कंसेप्ट

जगदलपुर। नक्सली उत्पात के चलते हाशिए पर आए बस्तर टूरिज्म को नए सिरे से जीवित कर दिखाया है एक सामान्य से किसान ने। उसने पांच गांवों को पर्यटक गांव के रूप में विकसित कर लिया है। यहां विदेशी टूरिस्ट पहुंचने लगे हैं। जगदलपुर ब्लॉक के ग्राम पराली के किसान शकील रिजवी ने यह कमाल कर दिखाया है। उन्होंने न केवल इस ब्लॉक के पांच गांवों को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर दिया है, वरन विदेशी सैलानियों को भी यहां लाने में कामयाब हो गए हैं।जगदलपुर। नक्सली उत्पात के चलते हाशिए पर आए बस्तर टूरिज्म को नए सिरे से जीवित कर दिखाया है एक सामान्य से किसान ने। उसने पांच गांवों को पर्यटक गांव के रूप में विकसित कर लिया है। यहां विदेशी टूरिस्ट पहुंचने लगे हैं। जगदलपुर ब्लॉक के ग्राम पराली के किसान शकील रिजवी ने यह कमाल कर दिखाया है। उन्होंने न केवल इस ब्लॉक के पांच गांवों को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर दिया है, वरन विदेशी सैलानियों को भी यहां लाने में कामयाब हो गए हैं।

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पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित है हजारों साल पुरानी अष्टभुजा शंकर प्रतिमा

सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।

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