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शंकराचार्य महाविद्यालय में व्यक्तित्व विकास में संगीत की भूमिका पर वेबीनार

Webinar on music in SSMV Bhilaiभिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी भिलाई के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के द्वारा दिनांक एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन 21 जुलाई को किया गया। इसका शीर्षक था-छात्रों के व्यक्तित्व विकास में संगीत की भूमिकाः को कोरोना के परिप्रेक्ष्य में। संगीत का छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर प्रभाव पर पूरे छत्तीसगढ़ में संभवतः यह पहला कार्यक्रम था। वर्तमान में करोना के बढ़ते असर के कारण लोगों में अवसाद एवं आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसे दृष्टिगत रखते हुए संगीत पर आधारित वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय नृत्य निदेशक एवं कथक कोरोयोग्राफर डॉ सरिता श्रीवास्तव के वीडियो से किया गया। स्वागत भाषण महाविद्यालय के अतिरिक्त निदेशक डॉ जे. दुर्गा प्रसाद राव ने दिया। प्रथम वक्ता के रूप में शोध सहायक, लोक संगीत विभाग, इंदिरा एवं कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ डॉ बिहारी लाल तारम ने कहा की संगीत हमारे जीवन को रसों से भर देता है। इसका हमारे जीवन के प्रत्येक प्रसंग से संबंध है। कोरोना के परिपे्रक्ष्य में संगीत ना केवल मानसिक अपितु शारीरिक रूप से भी हमें सबल बनाता है। शोध में पाया गया है कि संगीत का ना केवल मानव स्वास्थ्य पर अपितु पेड पौधे एवं पशु पक्षियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पडता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकगीत “हरि के गुण गाओ रे, चिरैया बोले“ की शानदार प्रस्तुति दी।
द्वितीय वक्ता कमला देवी संगीत महाविद्यालय के व्याख्याता डॉ दीपक बेडेकर ने कहा कि शास्त्रीय संगीत मानसिक तनाव दूर करता है। राग बागेश्री पर आधारित अलग-अलग सुप्रसिद्ध कलाकारों के गीत प्रस्तुत किए। उन्होंने अलग-अलग बंदिशों में किये गये प्रयोग की जानकारी भी दी। उन्होने गजल “सीने में जलन आंखों में तूफान क्यों है“ की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राग बागेश्री में ही सरस्वती वंदना को नये रूप में सृजित किया।
तृतीय वक्ता अंतर्राष्ट्रीय कत्थक नृत्यांगना डॉ अनुराधा दुबे ने कहा कि संगीत गायन, वाद्य और नृत्य का संम्मिलन है। संगीत जिसे सुनकर आनंद व सुकून मिले और हम अपनी परेशानियां भुल जाये। उन्होंने कहा की संगीत का सरलीकरण किया जाये ताकि उसे हम आत्मसात कर सके। संगीत का मानव स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। अतः हमें कार्य स्थल एवं घर में मध्यम स्वरलहरियां की व्यवस्था करनी चाहिए। वाद्य यंत्रों की जुगल-बंदी सकारात्मक सोच उत्पन्न करते है।
फिल्म निर्माता, गायक, निर्देशक एवं संगीतकार मनोज वर्मा ने संगीत को गणित से जोड़ा और कहा कि जिस प्रकार गणित बचपन से हमारे जीवन से जुडा रहता है उसी प्रकार संगीत भी जीवन के आरंभ से लेकर अंत तक हमसे जुडा हुआ है। संगीत हमारे हारमोन्स एवं शारीरिक प्रणाली को भी उत्प्रेरित करता है। जीवन में शांति प्राप्त करना है तो मनपसंद संगीत सुने।
कार्यक्रम के प्रधान संरक्षक श्री गंगाजली शिक्षण समिति के चेयरमेन आईपी मिश्रा एवं अध्यक्ष जया मिश्रा ने वेबीनार के सफल आयोजन हेतु महाविद्यालय परिवार को शुभकामना एवं बधाई प्रेषित की है। वेबीनार की संरक्षक महाविद्यालय की निदेशक एवं प्राचार्य डॉ रक्षा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि वेबिनार में 500 लोगो ने अपनी सहभागिता दी। फिटनेस एवं हेल्थ आज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कोविड महामारी के समय हमें समय का बेहतर उपयोग करते हुए शिक्षा और शोध के लिए कार्य करना है जिसमें संगीत बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। आज के वेबिनार से आशा है कि छात्र ही नहीं अपितु सभी उम्र के लोग लाभांवित होंगे।
वेबीनार की आयोजन सचिव डॉ श्रद्धा मिश्रा वेबीनार का पूरा सत्र श्री शंकराचार्य महाविद्यालय के फेसबुक एवं यूटयूब में लाइव प्रसारित किया गया।

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