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अपनी सुरक्षा को दांव पर लगाकर स्पर्श के चिकित्सकों ने बचाई दो लोगों की जान

Surgery team of Sparsh Multispeciality Hospital saves two livesभिलाई। स्पर्श मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम ने अपनी सुरक्षा को दांव पर लगाकर इमरजेंसी में दो मरीजों की जान बचा ली। दोनों ही मरीज युवा थे और उनकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। इनमें से एक युवक था जो सड़क हादसे में घायल होकर पहुंचा था। दूसरी मरीज एक 30 वर्षीय गर्भवती महिला थी। दोनों की सर्जरी की गई और एक सप्ताह से भी कम समय में दोनों अपने अपने घर चले गए।अस्पताल के मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट एवं निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ संजय गोयल ने बताया कि घटना 12 जुलाई की है। रविवार होने के कारण सुबह वे खेल मैदान में थे। तभी उन्हें इमरजेंसी कॉल आया। दो सर्जरियां होनी थीं। प्रणव काम्पलेक्स बोरसी निवासी 36 वर्षीय सुरेश यादव सेक्टर-9 के एमडी बंगला चौक के पास बाइक से गिर गए थे। उनका सिर फट गया था। जब मरीज को टेबल पर लिया गया, उसकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी होने लगी थी और आंखों की पुतलियां फैलने लगी थीं। नब्ज डूब रही थी। फ्रंटल पैराइटल क्रैनोटॉमी की जानी थी। न्यूरोसर्जन डॉ आदर्श त्रिवेदी पहुंच चुके थे। जब कॉल आया वे खेल मैदान में थे। तत्काल पहुंचकर उन्होंने खुद को सैनिटाइज तो किया पर पीपीई पहनने का समय नहीं था। 5 मिनट की देरी से भी मरीजों की जान को खतरा हो जाता। इसलिए अपनी सुरक्षा को खतरे में डालकर उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। उल्लेखनीय है कि डॉ गोयल अब तक अनेक जटिल सर्जरियों सहित 40 हजार से अधिक सर्जरियां सफलता पूर्वक पूर्ण कराने में सफल रहे हैं।
इसी समय एक दूसरे ऑपरेशन टेबल पर हाउसिंग बोर्ड कालोनी की 30 वर्षीय गर्भवती महिला को लिया गया था। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ कीर्ति कौरा एवं डॉ नमिता गुप्ता उसकी सर्जरी की तैयारी कर रही थी। इस महिला का गर्भ डिम्बनलिका में ठहर गया था। यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी का मामला था जिसमें भ्रूण गर्भाशय पहुंचने के रास्ते में ही ठहर जाता है। 8 सप्ताह 5 दिन के इस भ्रूण के कारण नलिका फट गई थी और रक्तस्राव होकर पेट में भर रहा था। मरीज की नब्ज डूब रही थी। बीपी नहीं मिल रही थी। दिमाग को रक्त नहीं मिलने के कारण लगातार झटके आ रहे थे। ऐसे मरीजों को एनीस्थीसिया पर लेना और उसके न्यूरोलॉजिकल फंक्शन्स को बचाना एक कठिन चुनौती होती है। पर चिकित्सकों की कोशिशें कामयाब रहीं। दोनों सर्जरियां सफल रहीं और सप्ताह के भीतर दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया। महिला 17 जुलाई को तथा युवक 22 जुलाई को अपने घर रवाना हो गया। अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ दीपक वर्मा एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ एपी सावंत ने चिकित्सकों एवं सपोर्टिंग स्टाफ को बधाई दी है।

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