मानव हस्तक्षेप से बिगड़ रहा प्रकृति का मिज़ाज – डॉ अनीता सावंत

Human intervention if ways of nature spelling havocभिलाई। “विकास के नाम पर मनुष्य के हस्तक्षेप से प्रकृति में असंतुलन की स्थिति पैदा होने लगी है जिससे प्रकृति के मिज़ाज बिगड़ रहे हैंI बढ़ती ग्रीन हाउस गैसों से वैश्विक ताप बढ़ रहा है। इसके दुष्परिणाम दिखने लगे हैंI” उपरोक्त विचार छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की क्षेत्रीय अधिकारी डॉ अनीता सावंत ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में व्यक्त किए। डॉ सावंत भारतीय सांस्कृतिक निधि (इन्टैक) के दुर्ग-भिलाई चैप्टर द्वारा स्कूली बच्चों के लिए आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा को संबोधित कर रही थींI उन्होंने बच्चों का आव्हान किया कि वे अपने छोटे छोटे प्रयासों व आदतों के बदलाव से जल, पेड़-पौधे, उपजाऊ मिटटी, जीव-जंतुओं, ईंधन जैसे प्रकृतिजन्य घटकों को बचाव व सरंक्षण में अपना योगदान देवें। इन्टैक के दुर्ग-भिलाई चैप्टर के संयोजक डॉ डी एन शर्मा ने कहा कि बदलती जीवन शैली व आधुनीकरण अपनाने के कारण प्राकृतिक ईंधन के बेहताशा दोहन व ज्वलन से प्रकृति में बढती विषाक्तता अगली पीढ़ी के लिए जीवन को कठिनता से जीने के लिए मजबूर करेगीI डॉ शर्मा बच्चों को इन्टैक के द्वारा आयोजित प्रकृति की देखभाल से सम्बंधित अखिल भारतीय प्रोजेक्ट प्रतियोगिता की तैयारी के विषय जानकारी भी दीI
इस आयोजन में डीएव्ही स्कूल हुडको, खालसा स्कूल दुर्ग, शंकराचार्य विद्यालय हुडको, शास. जेआरडी उ मा शाला दुर्ग, शास. उ मा शाला मरौदा, एसएनजी विद्यालय सेक्टर-10, शास. इंग्लिश मीडियम शाला रिसाली, ग़ालिब मेमोरियल स्कूल सेक्टर-6 व अन्य शालाओं के 65 विद्यार्थी व शिक्षक शामिल हुएI शिक्षाविद डॉ हरिनारायण दुबे, रायपुर चैप्टर के संयोजक राजेंद्र चांडक व विश्वास तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहेI आभार प्रदर्शन इन्टैक के दुर्ग-भिलाई चैप्टर के सह-संयोजक विद्या गुप्ता ने कियाI

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