भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में गणेश चतुर्थी एवं विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्नेह संपदा, भिलाई More »

भिलाई। सिविक सेन्टर की चौपाटी में लगी विशाल भारतीय सिल्क एक्सपो प्रदशर्नी का शनिवार शाम यंगिस्तान के चेयरमैन मनीष पाण्डेय ने विधिवत उद्घाटन किया। उनके More »

न्यूकैसल। कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप, न्युकैसल, इंग्लैंड में भारत ने 03 स्वर्ण, 02 रजत एवं 08 कांस्य पदक सहित कुल 13 पदक हासिल किया। पदक तालिका More »

भिलाई। साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनकी कृतियों की चर्चा करना और इसमें युवा पीढ़ी को शामिल करना प्रशंसनीय है। उनकी रचनाधर्मिता से More »

भिलाई। स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत श्रीशंकराचार्य महाविद्यालय ने ग्राम खपरी में एक वैचारिक आंदोलन खड़ा कर दिया है। महाविद्यालय के रोटरैक्ट क्लब, More »

 

Daily Archives: February 13, 2018

पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित है हजारों साल पुरानी अष्टभुजा शंकर प्रतिमा

सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।

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अद्भुत है 800 वर्ष पुराने इस अष्टकोणीय शिवमंदिर की संरचना

कटघोरा, कोरबा (छत्तीसगढ़)। पाली के प्राचीन अष्टकोणीय शिवमंदिर की एक खासियत ऐसी भी है, जो इसकी संरचना को राज्य में अद्वितीय बनाता है। वैसे तो ऐतिहासिक महत्व वाले कई प्राचीन मंदिर प्रदेशभर में निर्मित हैं, लेकिन तकनीकी दृष्टिकोण से यहां का अष्टकोणीय मंडप आधारित देवालय छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं। यह एक वर्ग के कोनों को काटने से बनी एक अद्भुत आकृति है, जो गभर्गृह से जुड़कर मंदिर को पूरा करती है। यही पुरातात्विक गुण इस ऐतिहासिक शिवमंदिर को राज्य की अन्य संरचनाओं से अलग पहचान देता है। कटघोरा, कोरबा (छत्तीसगढ़)। पाली के प्राचीन अष्टकोणीय शिवमंदिर की एक खासियत ऐसी भी है, जो इसकी संरचना को राज्य में अद्वितीय बनाता है। वैसे तो ऐतिहासिक महत्व वाले कई प्राचीन मंदिर प्रदेशभर में निर्मित हैं, लेकिन तकनीकी दृष्टिकोण से यहां का अष्टकोणीय मंडप आधारित देवालय छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं। यह एक वर्ग के कोनों को काटने से बनी एक अद्भुत आकृति है, जो गभर्गृह से जुड़कर मंदिर को पूरा करती है। यही पुरातात्विक गुण इस ऐतिहासिक शिवमंदिर को राज्य की अन्य संरचनाओं से अलग पहचान देता है। 

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