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साहित्य ही सत्य है उसकी प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी : डॉ मुरारीलाल शर्मा

गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग द्वारा तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

National Seminar on Hindi Literature at Sambalpur Universityसंबलपुर (ओडीशा)। साहित्य ही सत्य है उसकी प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग द्वारा ‘भक्तिकालीन साहित्य पुर्नालोचना आधुनिक संदर्भ में’ शीर्षक पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर संबलपुर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के संयोजक डॉ. मुरारीलाल शर्मा ने यह बात कही। डॉ. शर्मा ने कहा कि शब्द और साहित्य दोनों ब्रह्म हैं। साहित्य जहाँ नैतिकता का पाठ पढ़ाता है वहीं विश्वास जगाता है। Gangadhar-Meher-University- National Seminar at Gangadhar Meher University Sambalpurबीजेबी महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. गुलाम मोइनुद्दीन खान ने कहा कि तत्कालीन इतिहास को समझने की जरूरत है। तभी विकास की गति आगे बढ़ेगी। पंचायत महाविद्यालय बरगढ़ की प्राचार्य तथा हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. कमल प्रभा कपानी ने कहा कि कबीर बनाना, फकीर बनाना आज के जमाने में उपयोगी है। आज के युवा रहीम की पंक्तियों को समझकर उसका पालन करें तो कई समस्याओं को दूर किया जात सकता है।
कुलसचिव गिरीशचंद्र सिंह ने हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की प्रशंसा करते हुए कहा कि दो साल पहले खुले इस विभाग ने एकाडेमिक और अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय में एक स्थान बना लिया है। इसबार का विषय भी प्रासंगिक है उससे विद्यार्थी निश्चित रूप से लाभान्वित होंगे।
उपकुलसचिव उमाचरण पति ने कहा कि गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग को खुले महज दो साल हुआ है। इसके बावजूद यह विभाग इस विश्वविद्यालय में ही नहीं पूरे ओड़िशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। विश्वविद्यालय की ओर से हिन्दी विभाग ने पहली बार तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों का सफल आयोजन कर एक नई परंपरा की शुरूआत कर दी है। इस तरह गतिविधियों को देखते हुए आगामी दिनों पोस्ट डॉक्टरोरल कोर्स भी खोले जाने पर विचार किए जाने की बात कही।
संगोष्ठी निर्देशक तथा हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सदन कुमार पॉल की अध्यक्षता एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. ज्योति मिश्र के संयोजन में आयोजित समापन समारोह में डॉ. दाशरथी बेहेरा ने बताया कि इसबार संगोष्ठी में 30 से अधिक पेपर प्रस्तुत किये गये। अंत में शोधार्थी सुश्री नूतन सतपथी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
सभा के बाद विद्यार्थियों द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया जिसमें बेटी बचाओ पर खेला गया नाटक मन को छू लिया। तीन दिवसीय इस साहित्य संगोष्ठी में नवनालंदा बिहार के डॉ. हरेकृष्ण तिवारी, शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर से डॉ. तनूजा चौधरी, शिवपुर दीनबंधु महाविद्यालय के डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी, छत्तीसगढ़ के डॉ. बिहारी लाल साहू, हुगली मोहसिन कॉलेज के डॉ. चक्रधर प्रधान, रेवेंशा विश्वविद्यालय, कटक की डॉ. अंजुमन आरा, पंचायत महाविद्यालय बरगढ़ की प्राचार्य डॉ. कमल प्रभा कपानी, रायगढ़ छत्तीसगढ़ की डॉ. प्रीति षडंगी, दिल्ली के अदिती महाविद्यालय की डॉ. संध्या वात्स्यायन, संबलपुर के डॉ. जयंत कर शर्मा, शांतिनिकेतन के डॉ. रवीन्द्रनाथ मिश्र ने विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल होते हुए भक्तिकालीन साहित्य कैसे आज के संदर्भ में प्रासंगिक है उस पर विस्तृत रूप से चर्चा की। इस तरह तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में ओड़िशा सहित छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली आदि से पधारे वक्ताओं सहित 30 से अधिक पेपर प्रस्तुत किया गया।
तीन दिवसीय इस संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्रोफेसर तथा गंगाधर मेहर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. राधाकांत मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि समस्याएँ हर युग में एक जैसी होती है। भक्ति साहित्य ने अच्छी चीजों को ग्रहण किया है। भक्ति साहित्य मानव मूल्यों का साहित्य है। मानवता को बढ़ावा देनेवाला साहित्य है। बीज वक्ता पश्चिम बंगाल हुगुली स्थित मोहसिन कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शिवनाथ पांडेय ने कहा कि निर्गुण-सगुण सभी में प्रेम की बातें कही गई है। आधुनिक संदर्भ में देखा जाए तो मीरा ने सती प्रथा को तोड़ने की बात कही। तुलसी ने रामकथा के माध्यम से प्रेम की बात कही।
सम्मानित वक्ता राँची विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जंगबहादुर पांडेय ने कहा कि भक्तिकालीन साहित्य नमन का साहित्य है। आधुनिक काल की तरह भक्तिकाल में पद, प्रतिष्ठा, अर्थ के लिए साहित्य की रचना नहीं की जाती थी।
उद्घाटन सत्र में सम्मानित अतिथि कुलसचिव गिरीश चंद्र सिंह ने हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी की प्रशंसा की। उपकुलसचिव उमाचरण पति ने हिन्दी विभाग द्वारा किए जा रहे कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि विभाग द्वारा पिछले दो सालों में समसामयिक विषयों पर राष्ट्रीय स्तर की कई संगोष्ठियों का आयोजन कर अकादमिक गतिविधि की नई शुरूआत की है।
विभागाध्यक्ष तथा संगोष्ठी निर्देशक डॉ. सदन कुमार पॉल ने सभी का स्वागत किया तथा संगोष्ठी के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य का मध्यकालीन साहित्य हिन्दी साहित्य की अमूल्य भंडार है। उसे वर्तमान संदर्भ में चर्चा करने की आवश्यकता है। संगोष्ठी संयोजक डॉ. ज्योति मिश्र ने अतिथियों का परिचय प्रदान करते हुए संगोष्ठी पर किए जानेवाले कार्य की विवरण प्रदान किया। अंत में डॉ. दाशरथी बेहेरा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संयोजन छात्राएँ रीना पटेल एवं मोनिका क्षेत्री ने किया।

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