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स्वरूपानंद कालेज में कोविड 19-लॉकडाउन पर वेबिनार का आयोजन

Covid Webinar at SSSSMVभिलाई। स्वामी श्री स्वरूपांनद सरस्वती महाविद्यालय में आईक्यूएसी व माईक्रोबायोलॉजी विभाग के संयुक्त तात्वावधान में कोविड 2019-लॉकडाउन क्या खोया क्या पाया विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि एवं आधार वक्तव्य डॉ. अरुणा पल्टा कुलपति हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व में कोविड 19 के कारण लॉकडाउन है इसका दुष्प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है पर इस लॉकडाउन में हमने बहुत कुछ पाया भी है। आज शिक्षक आॅनलाईन शिक्षा दे रहे हैं तो विद्यार्थी भी अनेक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिक्षा ग्रहण कर रहे है। हमने वेबिनार के लिये पांच बिन्दुओं का चयन किया है- अनुसंधान, साइंस एण्ड रिसर्च, मेडिकल एण्ड हेल्थ, एजुकेशन एण्ड टेक्नोलॉजी, इंडियन इकोनॉमी, सोसायटी कल्चर एण्ड मीडिया, एनवायरनमेंट आदि विषय लिये गये है।
अपने आधार वक्तव्य में डॉ. अरुणा पल्टा ने कहा कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इस लॉकडाउन में अगर हमारी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई तो हमने स्वास्थ्य सेवाओं में आत्म निर्भरता भी प्राप्त की है। साइंस व रिसर्च को सुनहरा मौका मिला है। हम इस पर लंबे समय तक रिसर्च कर सकते है जिसके बेहतर परिणाम सामने होंगे। आज मेडिकल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक सभी मिलकर कार्य कर रहे हैं। जहॉं छोटे-छोटे उद्योग धंधे व मजदूरों को बहुत नुकसान हुआ है तो हमने कम खर्चे में जीना सीख लिया है व जाना आवष्यकता कम है। हम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे है पर भावनात्मक रूप से एक दूसरे से ज्यादा जुड़ गये। मीडिया ने हर वर्ग की समस्या को सामने रख अपनी जिम्मेदारी निभाई है। हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजो रहें है वहीं पर्यावरण इतना शुद्ध हो गया है जितना वह पिछले 100 वर्षों में कभी नहीं हुआ था। आवश्यकता आविष्कार की जननी है, लॉकडाउन के बाद हम हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होंगे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री गंगाजलि शिक्षण समिति के अध्यक्ष आई.पी. मिश्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर करोना महामारी का बहुत खराब असर होगा। देश की आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट आयेगी। लोगों को भोजन मिले व स्थानीय स्तर पर अस्थाई रोजगार कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित करने की आवष्यकता है जिससे मजदूरों को काम मिले व उन्हें पलायन न करना पड़े। अगर रोजगार सुनिश्चित किये बिना लॉकडाउन खुला तो अपराध बढ़ जायेंगे।
डॉ. दीपक शर्मा सीओओ स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा इस लॉकडाउन में वर्क फ्रोम होम न केवल निजी क्षेत्र बल्कि सरकारी उपक्रमों में एक नया कल्चर लेकर आया है। हमने स्वास्थ्य सेवाओं में निर्भरता प्राप्त की है। हम टेक्नोलॉजी का व्यापक रुप से प्रयोग करना सीख रहे है।
डॉ. तापेश चन्द्र गुप्ता शासकीय छत्तीसगढ़ महाविद्यालय रायपुर ने लॉकडाउन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव विषय पर कहा लॉकडाउन हमें अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की चेतावनी देकर जायेगा। छोटे-छोटे कुटीर उद्योग धंधे को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार से प्रतियोगिता करनी पड़ती थी वह अब कम होगा। स्थानीय बाजार को प्रोत्साहन मिलेगा, सरकार ने आर्थिक पैकेज दिया है वह भारतीय अर्थव्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा।
डॉ. सपना शर्मा शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर महाविद्यालय, दुर्ग ने कोविड-19 महामारी में समाज व मीडिया की जिम्मेदारी पर अपने विचार व्यक्त किये व कहा स्वच्छ भारत मिशन जो प्रारंभ हुआ था। वह हमारे लिये कारगार रहे है हमें समझ में आया हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था है न की शहरी। लॉकडाउन के कारण शराब बंदी हुई जिससे घरेलू हिंसा कम हुई। सड़क पर आवाजाही कम होने से सड़क दुर्घटना कम हुई। महिलाओं पर अपराध कम हुये।
डॉ. ए.के. श्रीवास्तव विभागाध्यक्ष बॉटनी उताई शासकीय महाविद्यालय ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा आज हम पी.पी.ई. किट बनाने में विश्व में दूसरे नंबर पर आ गये है। डब्ल्यू.एच.ओ. के अनुसार 1:100 डाक्टर व जन संख्या का अनुपात होना चाहिये। लॉकडाउन के कारण भीड़ नहीं हुई है लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किये जिसके कारण करोना तेजी से नहीं फैल पाया।
डॉ. प्रशांत शर्मा रिसर्च साईंटिस्ट बायोटेक लेब अंबिकापुर ने कोविड-19 पर्यावरण पर कहा 21 हजार करोड़ रु. खर्च करने पर भी गंगा साफ नही हुई थी पर इस लॉकडाउन में 3 हफ्ते में ही साफ हो गई। अब यह हमारी जिम्मेदारी है इसे हम बना कर रखे। वायु प्रदूषण में 44 प्रतिशत की कमी पाई गयी है। फ्रांस के रिपोर्ट के अनुसार कार्बन डायआक्साईड के उत्सर्जन में 8 प्रतिशत की कमी आयी है जो 40 साल में पहली बार देखी गई है।
प्रो. बी.आर. नंदेश्वर वैज्ञानिक आई.सी.ए.आर. नागपुर महाराष्ट्र ने कोविड-19 और विज्ञान विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये जैनेटिक बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से करोना वायरस के प्रभाव को कम करने के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। काटन में जिस तरह जिंस में बदलाव कर के रोग रहित बनाया है उसी तरह कोविड-19 वायरस को निष्क्रीय बनाया जा सकता है।
डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव डी.एस.डब्लू. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग ने कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा को धन्यवाद दिया व बताया स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं की समस्त वीडियो अपलोड किये जा चुके हैं जिन शिक्षकों को तकनीकी ज्ञान के अभाव के कारण आॅनलाइन क्लास नहीं ले पाते थे इस लॉकडाउन में उन्होंने वीडियो बनाये व विश्वविद्यालय के साइट में अपलोड किये। हम तकनीकी रुप से बहुत आगे निकल गये हैं। विद्यार्थियों को निष्चित ही इसका लाभ होगा।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शमा बेग विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी ने वेबिनार में उभरे बिंदुओं पर प्रकाश डाला व प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. निहारिका देवांगन विभागाध्यक्ष बॉटनी, संगठन सचिव स.प्रा. जिगर भावसार कम्प्यूटर साइंस, संचालक डॉ. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी, डॉ. स्वाती पाण्डेय स.प्रा. शिक्षा विभाग, दीपक सिंग सहा.प्रा. कम्प्यूटर साइंस, पूजा सोढ़ा सहा.प्रा. वाणिज्य, राखी अरोरा सहा.प्रा. माईक्रोबायोलॉजी, शीरिन अनवर सहा.प्रा. बायोटेक्नोलॉजी ने विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम में 52 विद्यार्थियों, शिक्षकों व शोधार्थियों ने भाग लिया।

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