हेमचंद विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों की आरडीसी बैठक 18 से 31 जनवरी के बीच

PhD RDC meeting dates announcedदुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों की आरडीसी बैठक 18 से 31 जनवरी 2021 के मध्य विश्वविद्यालय के टैगोर हॉल में आयोजित होंगी। इस बैठक में पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा सत्र 2019-20 में सफल शोधार्थी, परीक्षा में छूट प्राप्त विद्यार्थी एवं सत्र 2018-19 में अनुत्तीर्ण ऐसे शोधार्थी जिन्हें सत्र 2019-20 की परीक्षा में योग्य घोषित किया गया हो, वे सभी सिनाप्सिस के साथ उपस्थित हो सकते हैं। विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव, अकादमिक डॉ. सुमीत अग्रवाल ने बताया कि शोधार्थियों को सिनाप्सिस की 03 मूल प्रतियां तथा पीडीएफ फार्मेट में सीडी जमा करना अनिवार्य होगा। आरडीसी बैठक में शामिल होने हेतु पन्द्रह सौ रूपये का चालान यूको बैंक में जमा करना होगा। बैठक के पीएचडी रजिश्ट्रेशन फार्म, शुल्क रसीद, दसवीं, बारहवी, स्नातक एवं स्नातकोत्तर की अंकसूची, पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण तथा कोर्स वर्क परीक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाणपत्र/ एम.फिल की अंकसूची, शोध निर्देशक का एक प्रकाशित शोधपत्र तथा विभागीय शोध समिति (डीआरसी) द्वारा जारी प्रमाणपत्र एवं पीएचडी कोर्स वर्क एवं शोध केन्द्र में उपस्थिति संबंधी प्रमाणिक विवरण के दस्तावेज पीएचडी सेल में 11 जनवरी से 16 जनवरी 2021 के मध्य जमा करना होगा।
विश्वविद्यालय के अध्यादेश क्रमांक 45 के अनुसार शोधार्थी को विभागीय शोध समिति डीआरसी के समक्ष शोध रूप रेखा की मौखिक प्रस्तुतिकरण देना होगा, जिसमें आवश्यकता अनुसार डीआरसी कमेटी परिवर्तन अथवा संसोधन का सुझाव दे सकती है। डीआरसी द्वारा अंतिम रूप से मान्य सिनाप्सिस को डीआरसी के चेयरमेन द्वारा अग्रेषित किये जाने पर ही शोधार्थी 18 जनवरी से 31 जनवरी 2021 के मध्य आयोजित आरडीसी बैठक में शामिल हो पायेंगे।
विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि समस्त शोध केन्द्रों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्देशित किया गया है कि वे शोधार्थियों की सिनाप्सिस में परिवर्तन/संसोधन अथवा सुझाव हेतु दिनांक 29 दिसंबर से 09 जनवरी 2021 के मध्य डीआरसी की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित करा लेवें। इस बैठक के बाद शोधकेन्द्र विश्वविद्यालय द्वारा जारी निर्धारित प्रमाणपत्र प्रारूप में शोधार्थी को सिनाप्सिस मौखिक प्रस्तुति संबंधी प्रमाणपत्र जारी करेंगे। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रस्तुत की जाने वाली शोध रूपरेखा का प्रारूप दुर्ग विश्वविद्यालय की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध है। शोधार्थी इसका अवलोकन कर तदानुसार सिनाप्सिस तैयार कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *