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इतनी भी बुरी नहीं है दारू, देती है होसला-प्रेरणा भी

“पी गया चूहा- सारी व्हिस्की ….. कड़क के बोली, कहां है बिल्ली। दुम दबाके बिल्ली भागी, चूहे की फूटी किस्मत जागी। खेल रिस्की था, व्हिस्की ने किया बेड़ा पार.” फिल्म…

केन्द्रीय एजेंसियों के पास सबूत कम, डंडे का जोर ज्यादा

कहा गया है – “पर पीड़ा सम नहीं अधमाई”. पर जिसके हाथ में अधिकार होता है वह उसका बर्बर प्रयोग करता ही है. अंग्रेज भी करते थे और देसी सरकारें…

बिजली बिल ; झारा कहे सुई से, तेरे पेंदे में छेद

यह कहावत थोड़ी पुरानी जरूर है पर है बड़े काम की. वैसे आधुनिक दौर मोटिवेशनल स्पीकर्स का है. अब यह कहा जाता है कि जब आप एक उंगली दूसरे की…

प्यार का प्रेशर और टुकड़े-टुकड़े बरामद होती लाश

अपराधों के पैटर्न पर अंतरराष्ट्रीय शोध बताते हैं कि प्यार के मौसम में सर्वाधिक अपराध होते हैं. इन दिनों में युवा जमकर पार्टी करते हैं और वहीं पर जघन्य अपराधों…

नगदी की धंधे में चौपट हो गया “देवभोग” प्रोजेक्ट

देवता का भोग संकट में है. हालत पूजा पंडालों जैसी हो गई है. 56 भोग घटते-घटते खीरे के टुकड़ों पर आ टिका है. जी हां! बात कर रहे हैं सरकारी…

क्या वाकई सर्वशक्तिमान है “वक्फ”, या सिर्फ भ्रम फैलाया?

“वक्फ” का मामला पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. बताया जा रहा है कि “वक्फ” के पास इतनी शक्तियां हैं कि वो किसी भी जमीन पर…

फोकट का भात और मुफ्त की दारू ने बिगाड़ी लोकतंत्र की सूरत

देश में लोकतंत्र की भद्द पिटी है तो उसके लिए जितने जिम्मेदार नेता हैं, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार हम आम नागरिक हैं. नेता अपनी सुविधा के लिए जनता को भीड़…

बाल दिवस पर इसलिए जरूरी है डायबिटीज की चर्चा

14 नवम्बर को बालदिवस के साथ ही डायबिटीज डे भी है. दोनों के बीच गहरा संबंध है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 2.5…

हुंकार रैली और फुफकारते नेता क्या बना पाएंगे माहौल?

भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा किया है. महतारी हुंकार रैली से पहले युवा मोर्चा की मशाल रैली को…

पढ़े लिखों की बदतमीजी से भी बिगड़ती है यातायात व्यवस्था

यातायात व्यवस्था किसी भी शहर के चाल-चरित्र का आईना होती है. लोगों में कितना ‘सिविक सेंस’ है, वहां की ट्रैफिक को देखकर ही इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. लोग…

“राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते”

फिल्म “राम तेरी गंगा मैली” के इस टाइटल सांग में बात सौ टका खरी कही गई है. नदियों को जीवनदायिनी माना गया है. सभी सभ्यताओं का विकास नदियों के तट…

आरू का ट्रोल होना : घासीदास की भूमि पर यह कैसी संकीर्ण सोच

जन्मदिन हो या विवाह वार्षिकी, बिना केक के कोई काम नहीं होता. बिना डांडिया के नवरात्रि नहीं होती, बिना पंजाबी पॉप के डांस नहीं होता. फिर छठ से बैर क्यों?…