भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में गणेश चतुर्थी एवं विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्नेह संपदा, भिलाई More »

भिलाई। सिविक सेन्टर की चौपाटी में लगी विशाल भारतीय सिल्क एक्सपो प्रदशर्नी का शनिवार शाम यंगिस्तान के चेयरमैन मनीष पाण्डेय ने विधिवत उद्घाटन किया। उनके More »

न्यूकैसल। कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप, न्युकैसल, इंग्लैंड में भारत ने 03 स्वर्ण, 02 रजत एवं 08 कांस्य पदक सहित कुल 13 पदक हासिल किया। पदक तालिका More »

भिलाई। साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनकी कृतियों की चर्चा करना और इसमें युवा पीढ़ी को शामिल करना प्रशंसनीय है। उनकी रचनाधर्मिता से More »

भिलाई। स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत श्रीशंकराचार्य महाविद्यालय ने ग्राम खपरी में एक वैचारिक आंदोलन खड़ा कर दिया है। महाविद्यालय के रोटरैक्ट क्लब, More »

 

Daily Archives: August 15, 2018

वसुन्धरा के स्त्री विमर्श पर केन्द्रित अंक का विमोचन

Vasundhara Releasedभिलाई। भिलाई निवास के सभागार में वसुन्धरा के स्त्री विमर्श अंक का विमोचन प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक रमेश नैय्यर, प्रकाश दुबे एवं सुनील कुमार ने किया। इस अवसर पर वसुन्धरा सम्मान के संयोजक विनोद मिश्र, दिनेश वाजपेयी, अरुण श्रीवास्तव एवं इस अंक की अतिथि संपादक डॉ रक्षा सिंह मंच पर उपस्थित थे। वसुन्धरा के इस अंक में अमृत लाल बेगड़, केदारनाथ सिंह की स्मृतियां संजोई गई हैं।

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इमरजेंसी में भी इंदिरा ने कायम रखा था मीडिया से संवाद : नैय्यर

Vasundhara Sammanवरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे को दिया गया वसुन्धरा सम्मान      भिलाई। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भले ही इमरजेंसी लगाई थी पर उन्होंने मीडिया के संवाद कायम रखा था। मीडिया को किसी न किसी प्रकार के सेंसरशिप को तो बर्दाश्त करना ही पड़ता है। आपरेशन ब्लू स्टार से उन्होंने भारत की अखण्डता की रक्षा की थी जिसकी कीमत उन्होंने शहादत देकर चुकाई। उक्त उद्गार वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैय्यर ने भिलाई निवास के सभागार में कीर्तिशेष देवी प्रसाद चौबे की स्मृति में आयोजित वसुन्धरा सम्मान समारोह के दौरान व्यक्त किए।

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जिस घर में कमांडो ने संभाला था मोर्चा उसे सेना ने उड़ा दिया, पर बच गई जान

NSG Commandoएमजे कालेज में एनएसजी कमांडो ने सुनाई अपनी आपबीती   भिलाई। जिस घर में एनएसजी के कमांडो मोर्चा संभाले हुए थे, सेना ने अंतत: उसे ही उड़ा दिया। दरअसल फायरिंग रुक जाने के कारण भारतीय सेना की बटालियन को लगा था कि हमारे साथी शहीद हो गए और इमारत में अब केवल आतंकवादी ही रह गए हैं। एनएसजी में कमाण्डो रहे विजय बहादुर सिंह ने उक्त उद्गार एमजे कालेज में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में व्यक्त किए।

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