पेशाब रोकने में कठिनाई कर सकती है परेशान, पूर्ण इलाज संभव : डॉ दारूका

Urologist Dr Naveen Darukaभिलाई। चलते-फिरते या झुककर कोई सामान उठाने पर कभी भी पेशाब का निकल आना एक परेशान करने वाली शारीरिक अवस्था है। रोगी न केवल असहज हो जाता है बल्कि कई बार उसे शर्मिन्दगी भी उठानी पड़ती है। इस तरह की स्थिति का सामना कर रहे लोगों का सामाजिक जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ नवीन राम दारूका ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसका पूर्ण इलाज संभव है। इसका इलाज दवाओं से, कसरत द्वारा या सर्जरी द्वारा की जाती है।मूत्र संस्थान, गुर्दा एवं प्रोस्टेट विशेषज्ञ डॉ नवीन राम दारूका स्मृति नगर में आरोग्यम यूरोलॉजी एवं लिथोट्रिप्सी सेन्टर का संचालन करते हैं। डॉ दारूका ने कहा कि आम तौर पर हम मल-मूत्र विसर्जन को कुछ मांसपेशियों की सहायता से रोके रह सकते हैं तथा उचित समय एवं स्थान पर इनका विसर्जन करने में सक्षम होते हैं। पर अधिक उम्र या किसी अन्य व्याधि की वजह से हमारी यह क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसके कारण ब्लैडर (पेशाब की थैली) पर जरा सा भी दबाव पड़ने पर मूत्र रिसने लगता है। ऐसा चलते फिरते, उठते बैठते या सोते समय भी हो सकता है। गलत समय पर ऐसा होने से व्यक्ति झेंप जाता है और उसे शर्मिन्दगी भी उठानी पड़ सकती है। इस स्थिति का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।
Urologistडॉ दारूका ने बताया कि यह समस्या स्त्री और पुरुष दोनों को हो सकती है। दुनिया में करोड़ों लोग इस स्थिति का सामना करते हैं। संकोचवश वे इसकी चर्चा या चिकित्सा नहीं करा पाते और मानसिक वेदना झेलते हैं। आरोग्यम यूरोलॉजी एवं लिथोट्रिप्सी सेंटर में इसका सम्पूर्ण इलाज संभव है।
विश्व इंद्रीय निग्रह सप्ताह (वर्ल्ड कॉन्टिनेन्स वीक) के अवसर पर डॉ नवीन दारूका ने कहा कि अधिक उम्र में मूत्राशय की मांसपेशियों का कमजोर पड़ना या अधिक संवेदनशील हो जाना, मूत्र संक्रमण, मूत्रनली में सिकुड़न, डीमेन्शिया, रीढ़ की हड्डी में चोट, प्रोस्टेट का बढ़ना, लगातार कब्ज का बना रहना इसका कारण हो सकता है। महिलाओं में प्रसव पश्चात मांसपेशियों का ढीला पड़ जाना, रजोनिवृत्ति, आदि इसके कारण हो सकते हैं।
डॉ दारूका ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोग के सटीक कारणों का पता लगाने के बाद औषधि, कीगल एक्सरसाइज (मूत्राशय के आसपास की मांसपेशियों की कसरत) तथा सर्जरी के द्वारा रोग का उपचार किया जाता है। इसके बेहतरीन नतीजे आते हैं तथा रोगी एक बार फिर से टेंशनफ्री लाइफ जी सकता है।

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