भिलाई। इंदु आईटी स्कूल में प्री-प्राइमरी विंग के नर्सरी से केजी-2 तक के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। More »

भिलाई। केपीएस के प्रज्ञोत्सव-2019 में आज शास्त्रीय नृत्यांगनाओं ने पौराणिक कथाओं को बेहद खूबसूरती के साथ मंच पर उतारा। भरतनाट्यम एवं कूचिपुड़ी कलाकारों ने महाभारत, More »

भिलाई। कृष्णा पब्लिक स्कूल कुटेलाभाटा ने 73वां स्वतंत्रता दिवस खुले, स्वच्छंद आकाश में ध्वजारोहण करते हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस समारोह में स्कूल की बैण्ड More »

भिलाई। संजय रूंगटा ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस द्वारा संचालित रूंगटा पब्लिक स्कूल में 15 अगस्त को स्कूल प्रांगण में कक्षा नसर्री से पहली तक के बच्चों द्वारा More »

भिलाई। डीएवी इस्पात पब्लिक स्कूल सेक्टर -2 में रक्षाबंधन मनाया गया। इस त्यौहार को अग्रिम रूप से कक्षा नसर्री, एलकेजी तथा यूकेजी के छात्रों ने More »

 

Daily Archives: August 18, 2019

सामान्य यात्रियों की तरह मुख्यमंत्री भूपेश, मरकाम और सिंहदेव गए दिल्ली

रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव एवं पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम आज दोपहर इंडिगो की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। खास बात यह रही कि तीनों ने बिना किसी तामझाम के सामान्य यात्रियों की तरह 12वीं कतार में बैठकर यात्रा की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्रियों के लिए विशिष्ट सीट का प्रावधान होता है। छत्तीसगढ़ के ये तीनों दिग्गज नेता सामान्य यात्रियों की तरह ही विमान में सवार हुए और चुपचाप चलते हुए 12वीं कतार की सीटों पर बैठ गए। विमान के परिचारिकाओं या किसी भी फ्लाइट स्टाफ को पता ही नहीं चला कि विमान में कोई मुख्यमंत्री सफर कर रहा है।रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव एवं पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम आज दोपहर इंडिगो की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। खास बात यह रही कि तीनों ने बिना किसी तामझाम के सामान्य यात्रियों की तरह 12वीं कतार में बैठकर यात्रा की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्रियों के लिए विशिष्ट सीट का प्रावधान होता है। छत्तीसगढ़ के ये तीनों दिग्गज नेता सामान्य यात्रियों की तरह ही विमान में सवार हुए और चुपचाप चलते हुए 12वीं कतार की सीटों पर बैठ गए। विमान के परिचारिकाओं या किसी भी फ्लाइट स्टाफ को पता ही नहीं चला कि विमान में कोई मुख्यमंत्री सफर कर रहा है।

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पूरी दुनिया में गाय का विशेष दर्जा, डाकटिकट, सिक्के व नोट हैं सबूत : तेजकरण

भिलाई। गाय या गौवंश केवल भारत में ही नहीं पूजी जाती, पूरी दुनिया में उसे सम्मान दिया जाता है। इन देशों में कई मुस्लिम राष्ट्र भी शामिल हैं। इन देशों में गाय पर डाक टिकट और सिक्कों के साथ ही करंसी भी प्रचलन में रही है। विश्व के कई देशों में आज भी गाय का प्रतीकात्मक उपयोग किया जाता है। यह कहना है पिछले साढ़े तीन दशक से गौकरूणा अभियान चला रहे तेजकरण जैन का। अपनी बात को मय साक्ष्य लोगों के सामने रखने के लिए वे अपने संग्रह की नि:शुल्क प्रदर्शनी लगाते हैं।भिलाई। गाय या गौवंश केवल भारत में ही नहीं पूजी जाती, पूरी दुनिया में उसे सम्मान दिया जाता है। इन देशों में कई मुस्लिम राष्ट्र भी शामिल हैं। इन देशों में गाय पर डाक टिकट और सिक्कों के साथ ही करंसी भी प्रचलन में रही है। विश्व के कई देशों में आज भी गाय का प्रतीकात्मक उपयोग किया जाता है। यह कहना है पिछले साढ़े तीन दशक से गौकरूणा अभियान चला रहे तेजकरण जैन का। अपनी बात को मय साक्ष्य लोगों के सामने रखने के लिए वे अपने संग्रह की नि:शुल्क प्रदर्शनी लगाते हैं।

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अनोखा मंदिर : माउंटआबू के अर्बुदांचल में पूजा जाता है शिवजी का अंगूठा

अचलगढ़। माउंटआबू में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है जहां भगवान शिव के अंगूठे की पूजा होती है। मंदिर में भगवान शिव के अंगूठे के निशान देखे जा सकते हैं। माउंटआबू को अर्धकाशी भी कहा गया है। भगवान शिव के अर्बुदांचल में वास करने का स्कंद पुराण में प्रमाण मिलता है। माउंटआबू की गुफाओं में आज भी सैकड़ों साधु तप करते हैं। कहते हैं कि यहां की गुफाओं में शिवजी का वास है जो प्रसन्न होने पर साक्षात दर्शन देते हैं। माउंटआबू की पहाड़ियों पर स्थित अचलगढ़ मंदिर पौराणिक मंदिर है जिसकी भव्यता देखते ही बनती है।अचलगढ़। माउंटआबू में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है जहां भगवान शिव के अंगूठे की पूजा होती है। मंदिर में भगवान शिव के अंगूठे के निशान देखे जा सकते हैं। माउंटआबू को अर्धकाशी भी कहा गया है। भगवान शिव के अर्बुदांचल में वास करने का स्कंद पुराण में प्रमाण मिलता है। माउंटआबू की गुफाओं में आज भी सैकड़ों साधु तप करते हैं। कहते हैं कि यहां की गुफाओं में शिवजी का वास है जो प्रसन्न होने पर साक्षात दर्शन देते हैं। माउंटआबू की पहाड़ियों पर स्थित अचलगढ़ मंदिर पौराणिक मंदिर है जिसकी भव्यता देखते ही बनती है।

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कुष्ठरोगियों के मसीहा पद्मश्री दामोदर बापट नहीं रहे! नहीं किया विवाह

बिलासपुर। पद्मश्री दामोदर गणेश बापट का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार थे। उन्होंने 42 सालों तक कुष्ठ पीड़ितों के इलाज और उनके सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे चांपा से आठ किलोमीटर दूर ग्राम सोठी में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम से जुड़े थे। मानव सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले इस युग ऋषि ने देहदान का भी संकल्प लिया था। तदनुसार उनकी पार्थिव काया रिम्स बिलासपुर को समर्पित कर दी गई। इस कुष्ठ आश्रम की स्थापना सन 1962 में कुष्ठ पीड़ित सदाशिवराव गोविंदराव कात्रे ने की थी।बिलासपुर। पद्मश्री दामोदर गणेश बापट का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार थे। उन्होंने 42 सालों तक कुष्ठ पीड़ितों के इलाज और उनके सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे चांपा से आठ किलोमीटर दूर ग्राम सोठी में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम से जुड़े थे। मानव सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले इस युग ऋषि ने देहदान का भी संकल्प लिया था। तदनुसार उनकी पार्थिव काया रिम्स बिलासपुर को समर्पित कर दी गई। इस कुष्ठ आश्रम की स्थापना सन 1962 में कुष्ठ पीड़ित सदाशिवराव गोविंदराव कात्रे ने की थी।

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