गुरूजी बनने-बनाने की जद्दोजहद, जो इसमें पास, उसे ही नौकरी

बेमेतरा। शुक्रवार को प्री बीएड और प्री डीएड की परीक्षाओं का आयोजन राज्यभर में किया गया। बेमेतरा के भी तीन केन्द्रों पर परीक्षा थी। सैकड़ों की संख्या में दूर-दूर से परीक्षार्थी एवं उनके पालकगण पहुंचे थे। न पानी, न पंखा और न पेड़ों की छांव - गुरुजी बनने और गुरुजी बनाने की जद्दोजहद में लोग नालियों पर सोते मिले। शुक्रवार को सुबह से ही पूरे बेमेतरा में बिजली बंद थी। बिजली बंद होने का नए भवनों में क्या मतलब होता है, इसका अनुभव सभी को हो गया। बिजली बंद मतलब पंखा नहीं, लाइट नहीं, पानी नहीं।बेमेतरा। शुक्रवार को प्री बीएड और प्री डीएड की परीक्षाओं का आयोजन राज्यभर में किया गया। बेमेतरा के भी तीन केन्द्रों पर परीक्षा थी। सैकड़ों की संख्या में दूर-दूर से परीक्षार्थी एवं उनके पालकगण पहुंचे थे। न पानी, न पंखा और न पेड़ों की छांव – गुरूजी बनने और गुरूजी बनाने की जद्दोजहद में लोग नालियों पर सोते मिले। शुक्रवार को सुबह से ही पूरे बेमेतरा में बिजली बंद थी। बिजली बंद होने का नए भवनों में क्या मतलब होता है, इसका अनुभव सभी को हो गया। बिजली बंद मतलब पंखा नहीं, लाइट नहीं, पानी नहीं। सड़कों की कोलतार और भवनों का कंक्रीट ग्रीष्म की धूप में झुलस रहा है और लोगों को झुलसा रहा है। जो एक दो बोतल पानी घर से लेकर चले थे, वह कब का चुक गया था। पथरीली बंजर जमीन पर बने कालेज के आसपास कहीं कोई पेड़ नहीं। कालेज भवन में न कोई गलियारा, न कोई शेड। कुछ बच्चे आसपास की दुकानों में एडजस्ट हो गये थे, पर बड़ी संख्या में लोग खुली धूप में खड़े थे। जब तबियत खराब होने लगी तो लोग नालियों की मेड़ पर ही सो गए। कुछ लोगों की तबियत खराब होने लगी तो वे परीक्षा दिए बिना ही घर लौट गए।

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