साइंस कालेज, दुर्ग में वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा हरेली पर्व का आयोजन

दुर्ग। महाविद्यालय में छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए हरेली पर्व सभी छात्रों एवं प्राध्यापकों ने उत्साव पूर्वक मनाया। हरेली पर्व के अंतर्गत वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम चित्रकला एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय के बी.ए., बीएससी तथा एमएससी के छात्रों ने उत्साहजनक तरीके से भाग लिया साथ ही वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा हरेली पर्व पर ‘परिचर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।दुर्ग। महाविद्यालय में छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए हरेली पर्व सभी छात्रों एवं प्राध्यापकों ने उत्साव पूर्वक मनाया। हरेली पर्व के अंतर्गत वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम चित्रकला एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय के बी.ए., बीएससी तथा एमएससी के छात्रों ने उत्साहजनक तरीके से भाग लिया साथ ही वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा हरेली पर्व पर ‘परिचर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परिचर्चा में भाग लेते हुए सर्वप्रथम महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. वेदवती मंडावी ने हरेली पर्व के आयोजन एवं उनके महत्ता पर प्रकाष डाला। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में हरेली पर्व मनाने के विभिन्न तरीकों के बारे में छात्रों को रोचक जानकारियां बतायी। तत्पश्चात् वनस्पति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने हरेली अर्थात् हरियाली पर्व को छत्तीसगढ़ के प्रथम त्यौहार के रूप में रेखांकित करते हुए बताया कि पौधे ही सभी मनुष्यों के लिए जीवन दायिनी होते है। इनके लगातार कम होने के कारण हमारे आसपास एवं पूरे विष्व में ग्लोबल वार्मिंग की संभावनायें लगातार बढ़ रही है, एवं ओजोन लेयर में छेद हो चुका है, जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी पर हानिकारक अल्ट्रा वायलेट, गामा एवं इन्फ्रारेट जैसी हानिकारक किरणों का सीधा प्रभाव मनुष्यों, पौधों, जानवरों पर दिखायी दे रहा है, जो कि बहुत ही चिंता का विषय है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.एम.ए. सिद्दीकी ने बताया कि हमारे संसार में सभी चीजें अस्थायी होती है। पदार्थ एक रूप से दूसरे रूप में लगातार बदलता रहता है। वायुमंडल में मुख्य पोषक तत्व के रूप में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटेशियम उपलब्ध रहती है, जिनका उपयोग पौधे एवं प्राणी अपने लिए करते है। इसीलिए धरती पर वृक्षों की अत्यधिक मात्रा का होना अतिआवष्यक है, ताकि सूर्य की किरणों के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकें। इस कार्यक्रम का सम्पूर्ण संचालन डॉ. सतीष कुमार सेन, सहायक प्राध्यापक वनस्पति शास्त्र ने किया। कार्यक्रम में विभाग के सम्मानीय प्राध्यापकगण प्रोफेसर गायत्री पाण्डेय, डॉ. जी.एस.ठाकुर सूक्ष्मजीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा कुलकर्णी, संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जनेन्द्र कुमार दीवान तथा विभाग के अन्य सदस्य डॉ. के.आई.टोप्पो, डॉ. विजय लक्ष्मी नायडू आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन डॉ. श्रीराम कुंजाम, सहायक प्राध्यापक ने हरेली पर्व की महत्ता एवं उपयोगिता के संदर्भ में रोचक जानकारियां प्रस्तुत कर किया। साथ ही महाविद्यालय के छात्र अमित टण्डन बी.ए. द्वितीय वर्ष, सौरभ निर्मलकर, बी.एससी प्रथम वर्ष कुलदीप कुमार, एम.ए. इतिहास आदि छात्रों ने अपने विचार प्रस्तुत किये।

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