स्वरूपानंद महाविद्यालय में तुलसी जयंती पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में तुलसी जयंती के अवसर पर हिन्दी विभाग द्वारा दोहा लेखन, पोस्टर, परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों व प्राध्यापको ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। विभागाध्यक्ष हिन्दी डॉ. सुनीता वर्मा ने कहा तुलसीदास का साहित्य हमारी विरासत है, लोगों के कंठ का हार है रामचरित मानस में कलयुग वर्णन के बहाने तत्कालीन समाजिक राजनीतिक परिस्थिति का चित्रण किया है तो रामराज्य वर्णन के बहाने आदर्ष राजा को मुख के समान होना चाहिये कहा है। आज जब लोकतंत्र में संकट ही संकट है सर्वत्र भ्रष्टाचार भाई भतीजावाद का बोलबाला है। आज हमारे राजनेता ही अन्याय से शासन प्रणाली को आगे बढ़ा रहे है तब तुलसी के रामराज्य की कल्पना प्रासंगिक हो जाती है।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में तुलसी जयंती के अवसर पर हिन्दी विभाग द्वारा दोहा लेखन, पोस्टर, परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों व प्राध्यापको ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। विभागाध्यक्ष हिन्दी डॉ. सुनीता वर्मा ने कहा तुलसीदास का साहित्य हमारी विरासत है, लोगों के कंठ का हार है रामचरित मानस में कलयुग वर्णन के बहाने तत्कालीन समाजिक राजनीतिक परिस्थिति का चित्रण किया है तो रामराज्य वर्णन के बहाने आदर्ष राजा को मुख के समान होना चाहिये कहा है। आज जब लोकतंत्र में संकट ही संकट है सर्वत्र भ्रष्टाचार भाई भतीजावाद का बोलबाला है। आज हमारे राजनेता ही अन्याय से शासन प्रणाली को आगे बढ़ा रहे है तब तुलसी के रामराज्य की कल्पना प्रासंगिक हो जाती है। Tulsi-Jayanti भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में तुलसी जयंती के अवसर पर हिन्दी विभाग द्वारा दोहा लेखन, पोस्टर, परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों व प्राध्यापको ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। विभागाध्यक्ष हिन्दी डॉ. सुनीता वर्मा ने कहा तुलसीदास का साहित्य हमारी विरासत है, लोगों के कंठ का हार है रामचरित मानस में कलयुग वर्णन के बहाने तत्कालीन समाजिक राजनीतिक परिस्थिति का चित्रण किया है तो रामराज्य वर्णन के बहाने आदर्ष राजा को मुख के समान होना चाहिये कहा है। आज जब लोकतंत्र में संकट ही संकट है सर्वत्र भ्रष्टाचार भाई भतीजावाद का बोलबाला है। आज हमारे राजनेता ही अन्याय से शासन प्रणाली को आगे बढ़ा रहे है तब तुलसी के रामराज्य की कल्पना प्रासंगिक हो जाती है।प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा हम रामचरित मानस से प्रेरणा ले कर आदर्श राज्य व राष्ट्र की स्थापना कर सकते है आज हम जातिवाद आरक्षण को बढ़ावा दे रहे रामचरित मानस में उसे दूर करने का प्रयास किया। मानव-मानव एक है सिद्वान्त की प्रतिष्ठा की राम केवट को हृदय से लगाते है तो शबरी के झूठे बेर भी खाते हैं। कर प्रणाली के बारे में विचार व्यक्त करते हुये कहा राजा को कर सूर्य के समान लेना जिससें किसी को आपत्ती न हो और राजा को मेघ के सामान लौटाना चाहिए। राश्ट्रीय योजनाओं को लाभ सबकों मिलना चाहिये। यह संदेष हमें राम चरित मानस देता है।
डॉ. पूनम निकुम्भ ने कहा वाल्मीकि के रामायण को आधार बनाकर रामचरित मानस लिखा एक मानव ठान ले तो वह लंका में पूल बना सकता हैं। रामचरित को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिऐं ।
डॉ. नीलम गांधी ने कहा कि रामचरित मानस हमे प्रबंधन का गुण सीखाता है राम ने अपने छोटे से छोटे अनुयायी का ध्यान रखा स्वयं साथ रहकर लड़ाई में भाग लिये आज के नेता पीछे रह कर लोगों को सामने रखते है ऐसे नेताओं को रामचरित मानस से नेतृत्व के गुण सीखना चाहिए।
डॉ.रचना पाण्डेय ने कहा कि तुलसी का व्यक्तित्व विलक्षण था जितना हम संघर्ष करते है उतना ही हम सीखते है। डॉ.पूनम शुक्ला ने कहा रामचरित मानस हमें तनाव प्रबंधन के गुण सीखता है आज लोगों को नींद नहीं आते दवाई खा कर सोते है वहीं रामचरित माानस की ये पंक्ति ‘होई वहीं जो राम रचि राखा व तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो’ पक्तियॉं हमाारे तनाव को दूर कर देती है।
श्रीमती शैलजा पवार ने कहा रामचरित मानस के सभी पात्र से हम कुछ न कुछ सीखते है। दशरथ से वचन पालन करना राम से मर्यादा में रहना देवी सीता, उर्मिला से हम कत्वर्य निश्ठा सुग्रीव, हनुमान से हम मित्रता व सेवा का भाव भरत से भाई के प्रति प्रेम का संदेश देते है।
डॉ. शमा ए बेग ने कहा रामचरित मानस से हमें नारी शक्ति की प्रेरणा मिलती है। सीता राम के साथ वन जाने का निर्णय लेती है इच्छा से लक्ष्मण रेखा पार करती है स्वयं अपने दोनों बच्चों को पालन पोशण करती है।
श्रीमती मंजूषा नामदेव ने कहा मुखिया को मुख के समान होना चाहिये का अनुकरण आज के नेतृत्य षक्ति को करना चाहिये ।
श्रीमती खुशबू पाठक ने कहा तुलसी ने जन-जन की काव्य भाषा अवधी में रामकथा का वर्णन कर रामकथा को जनसाधारण तक पहुंचाना आज हर घर में रामचरित मानस की एक प्रति जरूर है।
श्रीमती मीना मिश्रा ने कहा रामचरित मानस विष्व के सौं ग्रंथों में से एक है इनकी एक-एक दोहे हमें जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
सहा.प्राध्यापक पूजा सोढ़ा ने कहा राम ने 14 वर्श का वनवास सहर्श स्वीकार किया सीता ने भी पति की आज्ञा स्वीकार कर उनका साथ दिया। सहा. प्राध्यापक दुर्गावती मिश्रा ने कहा रामचरित मानस हमें सीखता है आवत ही हरसे नही नैनन नहीं है जहां आदर नहीं है वहॉं नहंी जाना चाहिए यही सिखाता हैं यह आज के लोग सादर सम्मान मिले न मिले पर कार्य सिद्ध जरूर करना चाहेते है। श्रीमती सुनीता शर्मा ने कहा राम के कार्यो पर प्रकाश डालते हुये कहा उन्होंने धर्म व सत्य की स्थापना की।
स्लोगन व पोस्टर में पुरस्कृत विद्यर्थियों के नाम इस प्रकार है – दोहा – दिव्या तिवारी, प्रियंका व रेणुका को क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार दिया गया। शुभी बाजपेयी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। चित्रकला में रेणुका सेन, दिव्या तिवारी एवं शिवानी सिंह को क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सांत्वना पुरस्कार सोनाली को दिया गया।
कार्यक्रम में डॉ.अजीता सजीत, डॉ. एस. रजनी मुदलियार, डॉ. निहारिका देवांगन, श्रीमती निशा पाठक, मुरली मनोहर तिवारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्रीमती सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी ने दिया।

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